Putrada Ekadashi Religious Significance: यूं तो एकादशी व्रत हर महीने दो बार मनाई जाती हैं। वही हर एकादशी अपने नाम के अनुसार फल प्रदान करती हैं। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधि पूर्वक पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होने के साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
बताया जाता है कि, सभी एकादशी व्रत में एकादशी पुत्रदा एकादशी व्रत सालभर में दो बार मनाई जाती हैं। एक सावन महीने में दूसरा पौष महीने । ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि, पुत्रदा एकादशी के दिन कुछ उपायों को करने से संतान प्राप्ति के योग बनते है साथ ही संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी के दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु को स्वच्छ तुलसी दल अर्पित करें। शास्त्रों में विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व बताया गया हैं। तुलसी दल अर्पित करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप कर सकते हैं।
एकादशी के दिन तुलसी माता की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करने की भी परंपरा हैं। परिक्रमा के दौरान अपनी मनोकामना के बजाय पहले भगवान विष्णु से स्वस्थ, सुखी और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करना उचित माना जाता हैं।
शाम के समय तुलसी के पास बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। सामर्थ्य के अनुसार 108 बार जाप किया जा सकता है।
तुलसी के पास दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता आती है। ऐसे में एकादशी की शाम को स्नान करने के बाद, तुलसी के पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ध्यान रखें कि दीपक में रुई की बाती के बजाय कच्चे सूत की बाती का इस्तेमाल करें।
तुलसी की मिट्टी को माथे पर लगाना भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सरल तरीका है। ऐसे में पूजा के दौरान तुलसी की सूखी हुई थोड़ी सी मिट्टी लेकर उससे अपने माथे पर तिलक लगाएं। ऐसा करने से दुर्भाग्य दूर होता है। साथ ही नौकरी में सफलता मिलती है।