मां स्कंदमाता (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

नवरात्रि के पांचवें दिन इस विधि से करें माता स्कंदमाता की पूजा, संतान प्राप्ति की होगी कृपा

Maa Skandamata :मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप देवी ‘स्कंदमाता’ को समर्पित होता है। ‘स्कंदमाता’ की उपासना से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इनकी पूजा से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।

सीमा कुमारी

Maa Skandamata puja:आज 26 सितम्बर 2025 को शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा- अर्चना के लिए को समर्पित है। ज्योतिषियों के अनुसार, संतान सुख, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति के लिए मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा बड़ा महत्वपूर्ण है।

मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और कार्यों की विघ्न-बाधा भी खत्म होती है।देवी के इस स्वरूप की पूजा अर्चना करने से जहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। वही, उसके मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता चार भुजाधारी हैं। ये अपने एक हाथ से पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को गोद में लिए हुए हैं। वहीं माता की दो भुजाओं में कमल के पुष्प सुशोभित हैं और एक भुजा ऊपर उठी हुई है स्कंदमाता अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की विधिवत पूजा से धन, यश, शांति और बल प्राप्ति होती है। तो आइए जानें नवरात्र के पांचवें दिन कैसे करें स्कंदमाता की पूजा, साथ ही जानिए भोग और मंत्र।

ऐसे करें मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा

स्नान और शुद्धिकरण:

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

प्रतिमा स्थापित करें

घर के पूजा स्थल या मंदिर में चौकी पर मां स्कंदमाता की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। मां को गंगाजल से स्नान कराएं, षोडशोपचार पूजन करें।

पुष्प और अक्षत

मां स्कंदमाता को कमल का फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। मंत्र जाप: "ॐ देवी स्कंदमातायै नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। आरती और दुर्गासप्तशती पाठ: मां स्कंदमाता की आरती करें और दुर्गासप्तशती या देवी कवच का पाठ करें।

इन मंत्र का करें जप

या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्विनीम्।।

पूजा का महत्व

संतान सुख

मां स्कंदमाता की पूजा से संतान सुख की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-शांति आती है।

आध्यात्मिक उन्नति

मां स्कंदमाता की पूजा से आध्यात्मिक उन्नति होती है और भक्तों को ज्ञान, शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

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नकारात्मक ऊर्जा का नाश

मां स्कंदमाता की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

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