सावन में शिवलिंग पर चढ़ाएं बस ये एक चीज (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

सावन में शिवलिंग पर चढ़ाएं बस ये एक चीज, भोले की कृपा से भरा रहेगा घर का भंडार

भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना शुरू हो गया है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यदि आप शिवलिंग पर कच्चा चावल यानी अक्षत चढ़ाते हैं, तो महादेव मन की मांगी मनोकामना शीघ्र पूर्ण कर देते हैं।

सीमा कुमारी

Sawan Somwar 2025: सावन महीने की शुरुआत हो चुकी हैं। आज सावन का पहला सोमवार पूरे देशभर में मनाया जा रहा है। शिवलायों में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हर मंदिर में इस समय हर हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं।

हर हिन्दू भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ में जुट गए हैं। सावन में भक्त महादेव की कृपा पाने के लिए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सोमवार पर भगवान शिव की पूजा करने से साधन की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

साथ ही घर में सुख,समृद्धि और खुशहाली आती है। पूजा के दौरान बाबा भोलेनाथ को भांग,धतूरा, बेलपत्र, जल, दूध, घी आदि चढ़ाने का विधान है। ऐसे में एक और चीज चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, आइए जानते हैं क्या....

आर्थिक सुख समृद्धि की कामना के लिए क्या चढ़ाना चाहिए

ज्योतिषयों के अनुसार, भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त सावन में शिव मंदिर जाते हैं और जलाभिषेक करते हैं। जलाभिषेक के बाद भगवान को बिल्वपत्र, घी, दूध, चंदन आदि चढ़ाते हैं। इसी के साथ भक्तों को कच्चा चावल भी शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। इससे जातकों के जीवन में सुख-शांति आएगी और सभी मनोकामना पूर्ण होगी। कुछ मान्यताओं के मुताबिक, शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से भक्त की आर्थिक परेशानी दूर होगी और धन लाभ होगा।

धन और ऐश्वर्य में होती है बढ़ोतरी

बता दें कि,शास्त्रों में चावल को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, इसे चढ़ाने से घर की सभी निगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है। कहा जाता है कि शिवलिंग पर चावन चढ़ाने मात्र से जातक के रोग और जीवन के अन्य दुखों को नाश हो जाता है। साथ ही धन, वैभव और ऐश्वर्य में वृद्धि होती है।

क्या है शिवलिंग पर कच्चा चावल चढ़ाने की मान्यता

कहा जाता है कि प्रकृति में सबसे पहले चावल की ही खेती की गई थी। उस समय ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए लोग शिवलिंग पर कच्चा चावल समर्पित करते थे। इसके अलावा, अन्न के रूप में चावल को सबसे शुद्ध माना जाता है क्योंकि ये धान के अंदर बंद रहता है।

इसलिए पशु-पक्षी इसे जूठा नहीं कर पाते। जैसा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मुझे अर्पित किए बिना जो कोई अन्न और धन का प्रयोग करता है, वो अन्न और धन चोरी का माना जाता है। इस तरह अन्न के रूप में भगवान को चावल अर्पित किया जाता है। ये भी माना जाता है कि अन्न और हवन ईश्वर को संतुष्ट कर देता है। इससे हमारे पूर्वज भी तृप्त हो जाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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