मां कूष्मांडा फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Navratri 4th Day: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को चढ़ाएं दही, हलवा, मालपुआ और पेठे का भोग, जानें महत्व

Navratri 4th Day Bhog: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को दही, हलवा, मालपुआ और पेठे का भोग लगाया जाता है। जानिए देवी की पूजा का प्रिय भोग और नवरात्रि के चौथे दिन से जुड़ी खास बातें।

रीता राय सागर

Highlights:

  • नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।

  • मां को मालपुआ, हलवा, दही और पेठे का भोग अर्पित किया जाता हैं।

  • मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

Maa Kushmanda Bhog: शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना होती है। माना जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हुई थी। इसी वजह से उन्हें सृजन की देवी भी कहा जाता है।

मां कूष्मांडा को आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनका स्वरूप ऊर्जा, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। देवी की पूजा से भक्तों को सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

मां कूष्मांडा को कौन-कौन से भोग चढ़ाएं?

नवरात्रि में हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को एक विशेष प्रकार के विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा है। मां कूष्मांडा को मालपुआ, दही, हलवा और पेठा का भोग लगाने की मान्यता है।

दही का भोग

मां कूष्मांडा की पूजा के लिए ताजा दही एक साफ कटोरी में रखकर देवी को अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। दही भारतीय भोजन और पूजा-पद्धति, दोनों में इस्तेमाल होता है। भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें।

हलवे का भोग

नवरात्रि में हलवा लोकप्रिय प्रसाद है। इसे सूजी, आटे या व्रत में इस्तेमाल होने वाले आटे से तैयार किया जाता है। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाएं औऱ पूरी श्रद्धा से माता को भोग लगाएं।

मालपुआ का भोग

मालपुआ मां कूष्मांडा को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख भोगों में गिना जाता है। यह एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे आमतौर पर आटे या मैदे के घोल से तैयार करके घी या तेल में से बनाया जाता है। इसके बाद इसे चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन मालपुआ का भोग बनाकर मां को अर्पित करें। इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी जोड़ा जाता है।

पेठे का भोग

मां कूष्मांडा के नाम का संबंध संस्कृत के 'कूष्मांड' शब्द से जोड़ा जाता है। इसे कद्दू या कुम्हड़े की एक किस्म है। अगर आप मां कूष्मांडा को पेठे का भोग लगाना चाहते हैं, तो साफ फल को पूजा में अर्पित करें।

मां कूष्मांडा की पूजा का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं में मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार, प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा करने से भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता आती है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप नई शुरुआत और सृजन की प्रेरणा देता है। इस दिन पूजा के साथ जरूरतमंदों की मदद करना, भोजन बांटना और परिवार के साथ समय बिताना भी त्योहार के भाव को सार्थक बनाता है।

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