पूजा में कौन-से 5 फूल नहीं चढ़ाने चाहिए? भगवान शिव से लेकर गणेश जी तक, जानें पूजा में फूलों के नियम

Hindu Puja Rules: हिंदू धर्म में पूजा के दौरान फूल चढ़ाने का खास महत्व है, लेकिन कुछ फूल खास देवी-देवताओं की पूजा में नहीं चढ़ाए जाते। जानिए ऐसे पांच फूलों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में।
Puja mein kaun se 5 phool nahi chadhane chahiye.
पूजा के फूल फोटो.सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित है।

  • भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते है।

  • आक, लाल गुड़हल और कनेर को लेकर मान्यताएं अलग-अलग हैं।

Flowers Not To Offer To Gods: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा के दौरान श्रद्धा और भक्ति भाव से फूल अर्पित किए जाते हैं। अलग-अलग देवी-देवताओं को विशेष फूल चढ़ाने की परंपरा है। जैसे भगवान शिव को धतूरा और आक, भगवान गणेश को दूर्वा और मां काली को लाल गुड़हल के फूल अर्पित किए जाते है।

इसी तरह कुछ फूलों को देवी-देवताओं की पूजा में नहीं चढ़ाने की भी मान्यता है। इनके पीछे धार्मिक ग्रंथों में बताए गए पूजा-पाठ के विधान हैं। आइए जानते हैं पांच ऐसे फूलों के बारे में, जिनका इस्तेमाल पूजा में सावधानी से किया जाता है।

केतकी का फूल

भगवान शिव की पूजा में केतकी का फूल अर्पित करने की मनाही है। इसके पीछे भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है।

कहा जाता है कि एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव ने एक अनंत ज्योतिर्लिंग का रूप धारण किया और दोनों देवताओं से उसका आदि और अंत खोजने को कहा।

भगवान विष्णु ज्योतिर्लिंग का अंत खोजने के लिए नीचे की ओर गए, जबकि भगवान ब्रह्मा उसका आरंभ खोजने ऊपर की ओर गए। दोनों को उसका छोर नहीं मिला। भगवान ब्रह्मा को रास्ते में केतकी का फूल मिला। उन्होंने उससे अपने पक्ष में झूठी गवाही देने को कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का आरंभ खोज लिया है। भगवान शिव इस असत्यता पर अप्रसन्न हुए और तभी से केतकी भगवान शिव को अप्रिय हो गई।

Ketaki Flower
केतकी के फूलफोटो.सोशल मीडिया

तुलसी

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की विशेष परंपरा है। लेकिन भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में तुलसी और भगवान गणेश से जुड़ा प्रसंग मिलता है। प्रचलित कथा के अनुसार, तुलसी ने तपस्या में लीन भगवान गणेश से विवाह करने की इच्छा जताई थी। भगवान गणेश ने विवाह का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इससे नाराज होकर तुलसी ने उन्हें श्राप दिया और भगवान गणेश ने भी तुलसी को श्राप दिया।

इसी कथा से भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल न करने की परंपरा शुरु हुई। इसके बजाय गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने का विशेष महत्व है।

Aak flower
मदार के फूलफोटो.सोशल मीडिया

आक का फूल

आक, जिसे मदार भी कहा जाता है, एक ऐसा फूल है जिसे भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। आक के फूल को देवी की पूजा में अर्पित न करने की बात कही गई है। धार्मिक ग्रंथों के तंत्रसार में आक को मां दुर्गा को अर्पित न करने की मान्यता बताई गई है। भगवान शिव की पूजा में आक के फूल और पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है।

लाल गुड़हल

लाल गुड़हल का फूल मां काली की पूजा में विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाता है। गुड़हल के लाल रंग को देवी के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप से जोड़ा जाता है। मां काली को गुड़हल की माला अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है, लेकिन लाल गुड़हल को भगवान विष्णु को न चढ़ाने की बात कही गई है।

Hibiscus
गुड़हल के फूलफोटो.सोशल मीडिया
Puja mein kaun se 5 phool nahi chadhane chahiye.
Navratri Special: नवदुर्गा के 9 रूपों में कैसे दिखती हैं महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की शक्तियां?
Kaner Flower
कनेर के फूलफोटो.सोशल मीडिया

कनेर का फूल

कनेर का फूल कई रंगों में मिलता है और इसका इस्तेमाल कुछ धार्मिक परंपराओं में भी होता है। कुछ लेखों में भगवान राम की पूजा में कनेर का फूल न चढ़ाने की मान्यता बताई गई है। बता दें कि कनेर का फूल जहरीला होता है। कनेर को भगवान राम की पूजा में चढ़ाना हर जगह वर्जित है।

Navbharat Live
navbharatlive.com