करमा पूजा (सौ.AI)
धर्म

Karma Puja 2026: भाई की लंबी उम्र के लिए बहनें क्यों पूजती हैं करम डाल? जानें इस अनोखी परंपरा का रहस्य

Karma Puja Ka Mahatva: करमा पूजा आदिवासी समुदाय का प्रमुख पर्व है। लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन बहन अपने भाई के लिए व्रत रखकर उसके दीर्घायु की कामना के लिए पूजा अर्चना करती है।

सीमा कुमारी

Karma Puja Date 2026: करमा पूजा झारखंड के प्रमुख त्योहारों में से एक है। जो हर साल आदिवासी समुदाय द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। झारखंड के अलावा, यह पर्व ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और असम में भी धूमधाम से मनाई जाती है।

इस दिन आदिवासी समाज के लोग करम देवता की पूजा करते है और परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना आदि करते है। आइए जानते है इस साल करमा पूजा कब मनाई जाएगी और इससे जुड़ी तमाम बातें ।

साल 2026 में करमा पूजा कब मनाई जाएगी?

इस वर्ष 2026 में कर्मा पूजा 22 और 23 सितंबर को मनाई जाएगी। मुख्य कर्मा पूजा 22 सितंबर 2026 को और फूलखोंसी यानी विसर्जन 23 सितंबर 2026 को हो।

भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है करम पर्व

करमा पर्व को भाई-बहन के प्रेम और आपसी सम्मान का त्योहार भी माना जाता है। लोक मान्यता के अनुसार,इस दिन बहन अपने भाई के लिए व्रत रखकर उसके दीर्घायु की कामना के लिए पूजा अर्चना करती है। हर साल करमा पूजा भाद्रमाह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनायी जाती है। भाई-बहन मिलकर इस पर्व को उत्साह के साथ मनाते है।

करमा पूजा कैसे की जाती है?

आदिवासी समाज में करमा पूजा का बड़ा महत्व है। इस पर्व की तैयारियां महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। घर और आंगन की साफ-सफाई की जाती है। पूजा स्थल को फूलों और पत्तों सजाया जाता है और महिलाएं व युवतियां पारंपरिक तरीके से पूजा की तैयारी करती है।

इस पर्व में जावा यानी अंकुरित अनाज या अनाज का विशेष महत्व होता है। जावा तैयार करके उसे पूजा स्थल पर रखा जाता है और करम देवता की आराधना की जाती है। कई जगहों पर करम डाल या करम वृक्ष की टहनी लाकर उसकी पूजा करने की परंपरा है। इस पेड़ को भाई का रूप मानते हुए, महिलाएं अपने और अपने परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती है।

आदिवासी समाज की उत्पत्ति और सुरक्षा का संबंध कर्मडाल से है। इसलिए यह पूजा उनके पूर्वजों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। इस पूजा में महिलाएं उपवास रखती हैं और कर्मडाल की पूजा करती हैं, ताकि उनके घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और समाज विकास की ओर अग्रसर हो।

यह पर्व प्रकृति, सामाजिक एकजुटता प्रतीक है

यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह परिवार के लोगों को साथ लाने, भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर भी है। इस तरह करमा पूजा में प्रकृति, खेती, परिवार और लोकपरंपरा चारों का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

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