Kali Yuga Beginning: हिंदू धर्म में समय को चार युगों में बांटा गया है- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अभी कलियुग चल रहा है। द्वापर युग के अंत में जब भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी से प्रस्थान किया था, उसके बाद कलियुग की शुरुआत हुई।
धार्मिक गणना में कलियुग की शुरुआत 3102 ईसा पूर्व से मानी जाती है। कुछ पंचांग में श्रीकृष्ण के वैकुंठ गमन की तिथि को भी इस युग की शुरुआत से जोड़ा जाता है।
काल गणना के अनुसार एक महायुग में चार युग होते हैं। इनका क्रम कुछ इस तरह है
सतयुग- 17,28,000 वर्ष
त्रेतायुग- 12,96,000 वर्ष
द्वापर युग- 8,64,000 वर्ष
कलियुग- 4,32,000 वर्ष
इन चारों युगों की अवधि मिलाकर एक महायुग में 43,20,000 वर्ष होते हैं। गणना के अनुसार कलियुग समय अंतराल के लिहाज से सबसे छोटा युग है।
महाभारत के बाद द्वापर युग का अंतिम चरण आया। श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान को द्वापर युग के अंत और कलियुग की शुरुआत बताया जाता है। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण को कलियुग से जोड़ा जाता है।
कलियुग को ऐसा समय बताया गया है, जब धर्म और नैतिक मूल्यों में धीरे-धीरे कमी आती है। मनुष्य के जीवन से सत्य, संयम, दया और धर्म जैसे गुण कमजोर होने लगते हैं। इस के विपरीत कलियुग को लेकर एक धार्मिक विचार यह भी है कि इस युग में भगवान के नाम का स्मरण और भक्ति साधना का सरल मार्ग माना गया है।
हिंदू कालगणना में कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष बताई गई है। इसकी शुरुआत 3102 ईसा पूर्व से मानी जाती है। इस गणना के अनुसार वर्तमान समय कलियुग के शुरुआती हिस्से में आता है और इसका बड़ा हिस्सा अभी बाकी है।
चार युगों के क्रम में कलियुग के बाद फिर से सतयुग आने की बात कही गई है। इस तरह सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलियुग का चक्र दोहराता रहता है। हिंदू कालदर्शन में समय को सीधी रेखा के बजाय एक चक्र के रूप में देखा जाता है। एक महायुग के पूरा होने के बाद युगों का चक्र दोबारा शुरु होगा।