Guru Pradosh 2026: गुरुवार और प्रदोष का संयोग, छात्रों के लिए ज्ञान और एकाग्रता से जुड़ा है ये दिन

Guru Pradosh Vrat: 8 अक्तूबर, गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा। गुरुवार और त्रयोदशी के इस संयोग में भगवान शिव की पूजा के साथ ज्ञान, बुद्धि और सही मार्गदर्शन की कामना की जाती है।
Guru pradosh vrat 2026 guruwar pradosh shiv puja.
गुरु प्रदोष व्रतफोटो.सोशल मीडिया
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Guru Pradosh Vrat 2026: 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और यह प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। जब तिथि में त्रयोदशी का प्रदोष गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी गुरुवार को पड़ रही है।

गुरुवार और प्रदोष का संयोग है खास

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। वहीं गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है और बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, विवेक, धर्म और मार्गदर्शन का गुरु कहा जाता है।

इसी वजह से गुरु प्रदोष को शिव भक्ति के साथ ज्ञान और सही निर्णय लेने की क्षमता के तौर पर भी देखा जाता है। इस व्रत को करने का उद्देश्य केवल धन या सफलता पाना नहीं, बल्कि मन को शांत रखना, अनुशासन और विवेक के साथ आगे बढ़ने की प्रार्थना करना भी है।

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प्रदोष काल में होती है भगवान शिव की पूजा

इस व्रत में दिनभर उपवास रखा जाता है। मुख्य पूजा प्रदोष काल में करने की परंपरा है। कई पंचांगों के अनुसार, गुरुवार को प्रदोष पूजा का समय शाम से रात तक रहेगा। पूजा के दौरान भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित किए जाते हैं। भक्त शिव मंत्र का जाप करते हैं और आरती करते हैं। इस दिन भोलेनाथ के 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जाता है।

किन लोगों के लिए खास माना जाता है?

गुरु प्रदोष का व्रत खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो जीवन में ज्ञान, शिक्षा, एकाग्रता और सही मार्गदर्शन चाहते हैं। यह विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान-बुद्धि के लिए भी किया जाता है। इसके लिए व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर कोई व्यक्ति केवल शिव पूजा, मंत्र जाप, ध्यान या दान आदि करके भी इस दिन को श्रद्धा के साथ मना सकता है।

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