पहला कांवड़िया कौन था? (सौ.AI) 
धर्म

First Kanwar Yatra: कौन था दुनिया का पहला कांवड़िया? जानिए किसने चढ़ाया था सबसे पहले भोलेनाथ पर जल

First Kanwar Yatra Facts: क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला कांवड़िया कौन था और सबसे पहले भगवान शिव पर जल किसने चढ़ाया था? जानिए कांवड़ यात्रा की पौराणिक कथा, इसकी शुरुआत, धार्मिक महत्व।

सीमा कुमारी

Who Started Kanwar Yatra Tradition: इस वर्ष सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। शिव भक्तों के लिए यह समय आस्था और कठिन तपस्या का होता है, जिसका मुख्य आकर्षण 'कांवड़ यात्रा' है। कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह केवल पैदल चलकर गंगाजल लाने की परंपरा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था, तप, संयम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया के सबसे पहले कांवड़िए कौन थे और उन्होंने किस मंदिर में अभिषेक किया था? अगर नहीं, तो चलिए जानते हैं इस बारे में।

दुनिया का पहला कावंड़िया कौन था?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित हैं। अलग -अलग ग्रथों और परंपराओं में और कांवड़ यात्रा को लेकर अलग-अलग प्रसंग मिलते हैं, इसलिए कांवड़ यात्रा की किसी एक कथा को सर्वमान्य ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जा सकता है, बल्कि इन सभी को धार्मिक मान्यताओं के रूप देखा जाता है। पहली प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवन परशुराम संसार के सबसे कांवड़िया कहे जाते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि, त्रेतायुग में भगवन परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर से पवित्र गंगाजल लाकर उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया था। कहते हैं कि यहीं से कांवड़ में जल लाकर शिव को अर्पित करने की परंपरा की शुरुआत हुई। माना जाता है कि आज भी इस स्थान का कांवड़ यात्रा से विशेष संबंध है।

कांवड़ यात्रा से जुड़ी यह भी हैं मान्यताएं

कांवड़ यात्रा से जुड़ी अन्य मान्यताओं के अनुसार, श्रवण कुमार को भी पहला कावड़िया माना जाता है, जिन्होंने सर्वप्रथम त्रेतायुग में कावड़ यात्रा की थी। अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराने के क्रम में श्रवण कुमार ने उन्हें कावड़ में बैठा कर हरिद्वार लाए थे और उन्हें गंगा स्नान कराया। वापसी में वे अपने साथ गंगाजल भी ले गए। इसे भी कावड़ यात्रा की शुरुआत माना जाता है।

वहीं प्रथम कांवड़ यात्रा की पौराणिक कथा रावण से भी जोड़ी जाती है। मान्यता है कि रावण ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का प्रभाव कम करने के लिए कांवड़ में जल भरकर महादेव का अभिषेक किया था। कुछ मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन से निकले हलाहल के प्रभावों को दूर करने के लिए देवताओं ने शिव पर पवित्र नदियों का शीतल जल चढ़ाया था।

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