भगवान शिव और शिवलिंग (सौ.सोशल मीडिया) 
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फाल्गुन का अंतिम प्रदोष 1 मार्च को, जानिए क्यों है यह प्रदोष विशेष? महादेव की कृपा के लिए इस विधि से करें पूजा

Pradosh Vrat Puja Vidhi: फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष 1 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में विधिपूर्वक पूजा करने से पापों से मुक्ति और पुण्य फल प्राप्त होता है।

सीमा कुमारी

Pradosh Vrat Kab Hai March 2026: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है जो हर महीने के कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता हैं। इस बार फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 रविवार के दिन है। रविवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

प्रदोष काल में पूजा करने का विधान

ज्योतिषयों एवं धर्म शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद के दो घंटे यानी प्रदोष काल में पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और शिव-पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति के सभी दोष दूर होते हैं, पाप मिटते हैं और उसे पुण्य फल प्राप्त होता है। पंचांग के अनुसार, यह माह का अंतिम प्रदोष व्रत होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

कब है फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत?

पंचांग के अनुसा, प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी को रात 8 बजकर 43 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 1 मार्च को शाम 7 बजकर 9 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए 1 मार्च को फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन रविवार है, इसलिए यह रवि प्रदोष होगा।

क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त?

प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। इसके चलते प्रदोष व्रत पर पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त 1 मार्च को शाम 6 बजकर 21 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। मान्यता है, कि इस समय पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

भगवान शिव को अर्पित करें ये शुभ चीजें-

ज्योतिषयों के अनुसार, प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं। कहा जाता है कि ऐसा करने से मन और वातावरण दोनों पवित्र होते हैं।

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इससे महादेव की कृपा बनी रहती है।

बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। ध्यान रखें कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं और ध्यान रखें कि वह टूटा या कटा हुआ न हो-

इसके अलावा उन्हें फूल, मिठाई, फल अर्पित करें। ध्यान दें कि भगवान पर लाल रंग का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।

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