

Jamia Millia Islamia Student Union Elections: जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र 15 दिनों से छात्रसंघ बहाली को लेकर आंदोलनरत हैं। 12 अक्टूबर को जामिया के 5 छात्रों ने भूख हड़ताल की घोषणा कर छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए। हड़ताल के बाद छात्रों का समर्थन मिला और फिर छात्रसंघ बहाली का मुद्दा नेशनल मीडिया में छा गया। बाद में आंदोलन कर रहे छात्रों का गुट दो हिस्सों में बट गया। एक गुट विश्वविद्यालय के आश्वासन के बाद आदोलन को समाप्त कर दिया। जबकि दूसरा गुट अभी भी छात्रसंघ बहाली को लेकर आंदोलन कर रहा है।
वहीं इस बीच संस्थान के कई शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया में बाधा डालने और राजनीतिक हस्तक्षेप की निंदा की है। इन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक तत्वों द्वारा छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को और भड़काने की कोशिश की गई। साथ ही इस कृत्य की निंदा की।
जामिया में साल 2006 के बाद छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों की मांग है कि अगर अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव होते हैं तो जामिया में छात्रसंघ चुनाव क्यों नहीं हो सकते हैं। इसको लेकर छात्रों ने 26 अक्टूबर को कुलपति को अपनी मांगों का एक औपचारिक पत्र भी सौंपा था। वहीं मंगलवार को यह विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों की एक बैठक में हुई।
जानकारी के लिए बता दूं कि 21 अक्टूबर को एक 'संविधान मसौदा समिति का गठन किया गया था। इस समिति को अदालती आदेशों, लिंगदोह समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों, विश्वविद्यालय के लागू नियमों व कानूनों की जांच करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
प्रशासन का कहना है कि विरोध-प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों ने 24 अक्टूबर से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारत पर कब्जा कर लिया है। वहां ताला लगा दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद के अनधिकृत रूप से परिसर में घुसने के बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन को 25 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।
उन्होंने बताया कि इस स्थिति के कारण विश्वविद्यालय को उस तारीख से लेकर दीपावली की छुट्टियों तक पढ़ाई को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करना पड़ा है, और आगे की स्थिति की समीक्षा के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिन बाद कराए जाएंगे। यानी चुनाव की तारीख छात्र संघ के संविधान को स्वीकृति मिलने पर निर्भर करेगी। छात्रों की और मांगे हैं जिसको लेकर छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। एजेंसी इनपुट के साथ।