गणेश प्रतिमा फोटो.सोशल मीडिया
धर्म

Ganesh Chaturthi 2026: भगवान गणेश को क्या प्रिय है? जानें उनके पसंदीदा फूल, वाहन और पूजा से जुड़ी खास बातें

Lord Ganesha Favourite Things: भगवान गणेश को मोदक बेहद प्रिय हैं, लेकिन इसके अलावा गणपति बप्पा को क्या-क्या प्रिय है? जानें दूर्वा, फूल, शमी और मन्दार से लेकर उनकी पूजा और प्रिय मंत्रों का महत्व।

रीता राय सागर

Bhagwan Ganesh Ko Kya Priya Hai: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और दुखहर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में गणपति बप्पा की पूजा करने की परंपरा है। भगवान गणेश अपने भक्तों की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर उनके जीवन के सभी दुखों को दूर करते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

गणपति की पूजा में कई ऐसी विशेष वस्तुओं और परंपराओं का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं भगवान गणेश को प्रिय मानी जाने वाली वस्तुओं, उनके अस्त्र-शस्त्र, वाहनों, पेड़-पौधों और पूजा-पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

भगवान गणेश के प्रिय अस्त्र-शस्त्र

भगवान गणेश के स्वरूप में कई तरह के अस्त्र-शस्त्र का वर्णन मिलता है। इनमें शूल, त्रिशूल, अंकुश, परशु (कुल्हाड़ी), पाश (फंदा), मुद्गल (गदा), टूटा हुआ दांत यानी एकदंत, खट्वांग (खोपड़ी वाला डंडा), खेटक (ढाल) और नागपाश (सांप का फंदा) प्रमुख हैं।

इनमें अंकुश और पाश को विशेष रूप से गणेश जी के स्वरूप से जोड़ा जाता है और एकदंत भगवान गणेश की विशिष्ट पहचान है।

गणेश जी के वाहन

भगवान गणेश का सबसे प्रसिद्ध वाहन मूषक यानी चूहा माना जाता है। हालांकि गणेशजी के अलग-अलग स्वरूपों में मोर, शेर और बाघ का भी उल्लेख मिलता है। मूषक को गणेश जी के वाहन के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। गणेश जी का मूषक स्वरूपइस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश सूक्ष्म से सूक्ष्म और बड़े से बड़े स्वरूप पर नियंत्रण रखते हैं।

लाल फूल और दूर्वा हैं प्रिय

गणपति पूजा में लाल फूल और दूर्वा का इस्तेमाल अवश्य किया जाता है। गणेश जी की पूजा में दूर्वा विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। गणेश पूजा के दौरान भक्त श्रद्धापूर्वक दूर्वा और लाल फूल अर्पित करते हैं। गणपति को दूर्वा अर्पित किए बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

शमी का पेड़ भी गणपति को है प्रिय

शमी का पेड़, जिसे वह्मी पेड़ के नाम से भी जाना जाता है, भगवान गणेश से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। गणेश पूजा में शमी के पेड़ और पत्तों से जुड़ी परंपराएं भक्ति भाव और मंगलकामना से जुड़ी हुई हैं।

मन्दार का पेड़ और मन्दार-गणेश

भगवान गणेश से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पेड़ मन्दार है। मान्यता है कि मन्दार पेड़ की जड़ की लकड़ी से गणेश जी की मूर्ति बनाई जाती है। इस रूप को 'मन्दार-गणेश' कहा जाता है। कहते हैं यदि मन्दार की लकड़ी में प्राकृतिक रूप से गणेश जी की आकृति बनी हुई दिखाई दे, तो उसे 'सिद्धि-गणेश' माना जाता है।

गणपति के भक्तों को क्या कहा जाता है?

भगवान गणेश के भक्तों को 'गाणपत्य' कहा जाता है। गणपति उपासना की परंपरा में इनके छह उप-संप्रदायों का उल्लेख मिलता है। इनमें महागणपति, हरिद्रा गणपति, उच्छिष्ट गणपति, नवनीत, स्वर्ण और संतान प्रमुख हैं। गणेश उपासना की अलग-अलग परंपराओं में भगवान के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है।

गणेश जी की पूजा विधि

भगवान गणेश की पूजा कई अलग-अलग तरीकों से की जाती है। इनमें गणेश चतुर्थी का व्रत, विनायक व्रत, स्तोत्रों का पाठ, गणेशजी का ध्यान, गणेश गायत्री मंत्र का जाप, गणेश नाम-जप और गणेश यज्ञ शामिल हैं।

गणपति उपासना में ध्यान और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन विधियों से भगवान गणेश की आराधना करते हैं। गणेश जी के अभिषेक के दौरान अथर्वशीर्ष और ऋग्वेद से संबंधित ब्रह्मणस्पति सूक्त का पाठ किया जाता है।

क्या है गणेश अथर्वशीर्ष?

अथर्वशीर्ष गणपति उपासना का एक महत्वपूर्ण पाठ है। 'अथर्वशीर्ष' शब्द को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है- अ, अथर्व और शीर्ष।

यहां 'अ' का अर्थ निषेध या 'नहीं', 'अथर्व' का अर्थ बेचैनी या हलचल और 'शीर्ष' का अर्थ अंत या परम लक्ष्य अर्थात् जो बेचैनी और हलचल को दूर कर परम लक्ष्य की ओर ले जाता है।

ब्रह्मणस्पति सूक्त क्या है?

ब्रह्मणस्पति भगवान गणेश का ही एक नाम है। ब्रह्मणस्पति सूक्त भगवान गणेश की स्तुति से जुड़ा मंत्र है। ऋग्वेद से संबंधित इस सूक्त में 11 अध्याय और 64 मंत्र हैं तथा इसकी रचना 11 ऋषियों द्वारा की गई है।

गणेश गायत्री मंत्र

भगवान गणेश की आराधना में गणेश गायत्री मंत्र का जाप भी किया जाता है। यह मंत्र इस प्रकार है-

ॐ भूर्भुवः स्वः।
ॐ गं गणपतये नमः।
एकदन्ताय विद्महे।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

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