भगवान विष्णु(सौ.AI) 
धर्म

आज से शुरू हुआ वैशाख का महीना, इस माह भूल से भी न करें ये काम

Mistakes To Avoid In Vaishakh Maas: वैशाख माह की शुरुआत के साथ ही धार्मिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। इस पवित्र महीने में कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए।

सीमा कुमारी

Vaishakh Maas Rules And Rituals:सनातन धर्म में जितना महत्व चैत्र महीने का उतना ही महत्व वैशाख महीने का है। इस वर्ष 2026 वैशाख महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है, जो 1 मई तक चलेगी। भगवान विष्णु को समर्पित इस महीने को माधव मास भी कहा जाता है।

स्कंद पुराण के अनुसार, “न माधवसमो मासो” अर्थात् वैशाख माधव मास के समान कोई और महीना नहीं है। वैशाख महीने में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य मिलता है।

वहीं, भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है। वही, ज्योतिषयों के अनुसार, वैशाख महीने में कुछ कार्य ऐसे है जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए?

वैशाख महीने में भूलकर भी न करें ये काम

  • देर तक न सोएं

वैशाख के महीने में सूर्योदय के बाद तक सोना अशुभ माना गया है। इससे स्वास्थ्य और पुण्य दोनों की हानि होती है। इसलिए ऐसी गलती करने से बचना चाहिए।

  • तामसिक भोजन से करें परहेज

इस महीने तामसिक भोजन में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे चीजों का त्याग करना चाहिए। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है इसलिए इस महीने केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।

  • जल की बर्बादी न करें

चूंकि यह महीना जल सेवा के लिए समर्पित है, इसलिए पानी की बर्बादी करना पाप माना जाता है। बल्कि इस महीने में जल दान को सबसे बड़ा पुण्य बताया गया है। राहगीरों को जल पिलाना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और मंदिर में जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत फलदायी होता है।

  • वाद विवाद एवं क्रोध से बचें

वैशाख महीने में किसी का अपमान न करें और न ही क्रोध करें। अपनी वाणी में मधुरता बनाए रखें।

वैशाख महीने का क्या है महत्व

वैशाख माह को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए इसे ‘माधव मास’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी पवित्र महीने में भगवान विष्णु ने नर-नारायण, नृसिंह और परशुराम जैसे अवतार लिए। इस माह में किए गए स्नान, दान और पूजा का फल “अक्षय” यानी कभी नष्ट न होने वाला होता है।

भीषण गर्मी के कारण प्यासे लोगों को जल पिलाना, घड़ा, पंखा, छाता, चप्पल, अन्न और गुड़ का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। साथ ही, सूर्योदय से पहले पवित्र जल से स्नान करने से पापों का नाश होता है।

वैशाख पूर्णिमा का संबंध विशाखा नक्षत्र से माना जाता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं, इसलिए यह महीना आध्यात्मिक साधना और पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है।

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