Ashok Gehlot Statement On MP MLA: राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने देश के सांसदों और विधायकों के दल-बदल और खरीद-फरोक्त को लेकर बड़ा बयान दिया है। माननीयों की तुलना जानवरों से करते हुए गहलोतने कहा कि सांसद और विधायक भैंस, घोड़े, गधों और बकरियों के जैसे बिक रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह बात जोधपुर के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। इस दौरान उन्होंनें जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त और कई राजनीतिक दलों में हो रही टूट-फूट पर गहरी चिंता व्यक्त की।
मंगलवार को जोधपुर पहुंचे अशोक गहलोत ने सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता में मीडियाकर्मियों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर चर्चा भी की। जोधपुर दौरे में गहलोत पावटा अस्पताल और एम्स पहुंचकर हाल ही में गंभीर संक्रमण का शिकार हुईं प्रसूताओं से मुलाकात की। उनके परिजनों भी मिले और डॉक्टरों से बात कर प्रसूताओं के स्वास्थ्य की स्थिति तथा चल रहे इलाज की विस्तृत जानकारी ली।
अशोक गहलोत ने अपने एक्स हैंडल पर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए एक पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, भाजपा द्वारा लगातार सांसदों की खरीद-फरोख्त करना सीधे तौर पर जनमत को एक खुली चुनौती है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता से '400 पार' सीटें जिताने का आह्वान किया था, लेकिन देश की सजग जनता ने उन्हें बहुमत से दूर केवल 240 सीटों पर ही समेट दिया।
गहलोत ने कहा कि आज केंद्र में एनडीए गठबंधन की सरकार चल रही है, जिसमें फिलहाल कोई खींचतान भी नजर नहीं आती। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और बीजेडी जैसे दलों के सांसदों को तोड़कर भाजपा और एनडीए में शामिल करना यह साफ़ दिखाता है कि भाजपा धनबल और बाहुबल के आगे जनता के जनादेश को कुछ नहीं समझती।
आगे उन्होंने कहा कि पहले तोड़-फोड़ का यह खेल केवल गुजरात तक सीमित था, जहाँ पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार होने के बावजूद भाजपा पांच साल तक लगातार विपक्षी विधायकों को तोड़ती रहती थी। अब यही तथाकथित 'गुजरात मॉडल' पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
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अशोक गहलोत ने युवाओं को अपील करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सोचना होगा कि आखिर इस देश में हो क्या रहा है? आज महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे आमजन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे सांसदों की अनैतिक खरीद-फरोख्त लगातार जारी है। क्या यह सरकार विपक्ष और विरोध की हर लोकतांत्रिक आवाज को पूरी तरह कुचल देना चाहती है? क्या भारत का महान लोकतंत्र अब दम तोड़ने की कगार पर है?