‘कांग्रेस मुक्त’ भूल जाइए, अब देश में शुरू हुआ ‘विपक्ष मुक्त भारत’ अभियान! क्षेत्रीय दलों में मची महा-बगावत
BJP Campaign: क्या भाजपा अपना ध्यान 'कांग्रेस-मुक्त' से 'विपक्ष-मुक्त भारत' पर केंद्रित कर रही है? तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी को बागी सांसदों के गंभीर आंतरिक विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: प्रिया जैस
भाजपा (सौजन्य-IANS)
BJP Opposition Free India Campaign: लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर हार का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यह बिल वापस नहीं लिया है। जिससे यह साफ हो गया है कि देर-सवेर भाजपा सरकार एक बार फिर इस बिल को सदन में लेकर आएगी।
इस बीच देश में बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और पंजाब में क्षेत्रीय दलों के सांसदों के अपने मूल दल से अलग होकर अलग गुट बनाने की मांग करने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन देने के मामले सामने आए हैं।
भाजपा का कांग्रेस मुक्त अभियान बंद
उससे यह संकेत मिल रहा है कि देश में अब भाजपा का कांग्रेस मुक्त अभियान बंद हो गया है। उसकी जगह देश में विपक्ष मुक्त भारत का अभियान दिख रहा है। एक राजनीतिक वर्ग का यह भी मानना है कि यह मध्यावधि चुनाव का संकेत भी है। लेकिन भाजपा ने इससे साफ इनकार किया है।
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भाजपा का कहना है कि मध्यावधि चुनाव क्यों कराए जाए। इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पहले की तरह चरम पर है। महंगाई नियंत्रण में है। देश में विपक्ष कमजोर है। ऐसे में मध्यावधि चुनाव क्यों कराई जाए।
सबसे पहला बड़ा गेम खेला बंगाल में
अगर हाल के घटनाक्रम को देखा जाए तो भाजपा ने सबसे बड़ा उलटफेर पश्चिम बंगाल में किया। जहां उसने सत्ता में परिवर्तन करते हुए उस पर कब्जा कर लिया। लेकिन इससे भी बड़ा राजनीतिक उलटफेर उस समय हुआ, जब टीएमसी की हार के दो सप्ताह के अंदर ही उसके अंदर बड़ी बगावत सामने आई। उसके 28 में से करीब 20 सांसदों ने भाजपा के साथ जाने का ऐलान कर दिया।
हालांकि, भाजपा ने उनको अपने साथ नहीं लिया। इसकी जगह इन सांसदों ने एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया लेकिन साथ ही कहा कि वे भाजपा सरकार को समर्थन देंगे। इसके उपरांत शिवसेना यूबीटी के 9 में से 7 सांसदों के बगावत की सूचना सामने आने लगी।
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महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में आधिकारिक तौर पर विलय की तैयारी कर रहे और व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों की सूची में संजय उर्फ बंदू जाधव (सांसद, परभणी), संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर (सांसद, धाराशिव), संजय दीना पाटिल (सांसद, उत्तर पूर्वी मुंबई), भाऊसाहेब वकचौरे और नागेश पाटिल आष्टीकर शामिल हैं।
