AAP सरकार का मनरेगा के खिलाफ मोर्चा (फोटो- सोशल मीडिया) 
पंजाब

मजदूरों की पुकार पहुंचेगी दिल्ली दरबार! PM को भेजे जाएंगे 10 लाख खत, AAP का मनरेगा के खिलाफ मोर्चा

पंजाब में AAP ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला। मुद्दा मनरेगा कानून में बदलाव, जिसने लाखों मजदूरों की नींद उड़ा रखी है। लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाते हुए मान सरकार ने बड़ा कदम उठाया।

सौरभ शर्मा

Punjab News: पंजाब में आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। मुद्दा है मनरेगा कानून में बदलाव, जिसने लाखों मजदूरों की नींद उड़ा रखी है। इस लड़ाई को सड़क से सदन तक ले जाते हुए मान सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। विधानसभा के विशेष सत्र में आप विधायकों ने 10 लाख से अधिक मनरेगा मजदूरों के लिखे खत पेश किए। अब यह लाखों चिट्ठियां सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाई जाएंगी, ताकि दिल्ली में बैठे हुक्मरान गरीबों का दर्द महसूस कर सकें।

पार्टी प्रवक्ता ने साफ किया है कि केंद्र ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम और स्वरूप बदलकर विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम कर दिया है। इसके विरोध में पंजाब के कोने-कोने से मजदूरों की आवाज उठाई गई है। इन पत्रों में केवल मांगें नहीं, बल्कि उन परिवारों का संघर्ष लिखा है जो दो वक्त की रोटी के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं। विधानसभा में खुद मनरेगा मजदूरों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और भी ज्यादा धारदार बना दिया है।

फाइलों से निकलकर PM की टेबल तक

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने फैसला किया है कि मजदूरों की यह आवाज विधानसभा की फाइलों में दबकर नहीं रह जाएगी। सरकार इन 10 लाख पत्रों के पुलिंदे को सीधे प्रधानमंत्री को सौंपेगी। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार को जमीनी हकीकत से रूबरू कराना है। पंजाब के मजदूर लंबे समय से भुगतान में देरी और काम न मिलने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार चाहती है कि इन समस्याओं का तत्काल समाधान हो। यह पत्र अभियान केंद्र सरकार को जगाने और गरीबों की आवाज को सत्ता के सबसे ऊंचे गलियारों तक पहुंचाने की एक ठोस कोशिश है।

काम का संकट और देरी की मार

पार्टी प्रवक्ता ने बताया कि कई इलाकों में मजदूरों को समय पर काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे बेरोजगारी का संकट गहराता जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता मनरेगा फंड को लेकर है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा समय पर जारी नहीं किया जा रहा। फंड रुकने से योजना का काम प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर गरीब परिवारों की आजीविका पर पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी ने इसे केंद्र पर दबाव बनाने की रणनीति बताया है ताकि फंड जारी हो सके। पार्टी ने दोहराया है कि वह गरीबों की सच्ची हितैषी है और उनके अधिकारों की यह लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।

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