Zhari Jamni Industrial Development: घने जंगल, समृद्ध वनसंपदा और कोयला, डोलोमाइट समेत विभिन्न खनिजों के विशाल भंडार से संपन्न झरी जामणी तहसील में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। खनिज संपदा के चलते कई उद्योगों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हुआ है और कुछ उद्योगों ने यहां निवेश की तैयारी भी दिखाई है।
लेकिन नए उद्योगों के स्वागत से पहले तहसील में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों द्वारा सड़क, बिजली, पानी, यातायात परिवहन, प्रशासनिक प्रक्रियाओं, सुरक्षा तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि राजस्व, कर और विभिन्न शुल्क अदा करने के बावजूद यदि अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तो नए निवेशकों के लिए यहां उद्योग स्थापित करने का भरोसा कायम करना चुनौतीपूर्ण होगा। उद्योग आएंगे, लेकिन टिकेंगे कैसे?
उद्योग स्थापित करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उन्हें लंबे समय तक टिकाऊ वातावरण उपलब्ध कराना भी है। जांच, अनुमति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान उद्यमियों पर अनावश्यक दबाव डाले जाने की शिकायतें यदि सामने आती हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। उद्योगों में नियमों का उल्लंघन हो तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली या दबाव को स्थान नहीं मिलना चाहिए।
नए उद्योगों के लिए केवल खनिज संपदा पर्याप्त नहीं है। अच्छी सड़कें, पर्याप्त बिजली-पानी, बेहतर संचार व्यवस्था, कुशल मनुष्यबल, औद्योगिक सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन भी उतने ही आवश्यक हैं। इसलिए झरी जामणी के औद्योगिक विकास का सवाल केवल यह नहीं है कि 'उद्योग यहां आएंगे या नहीं?' बल्कि असली सवाल यह है कि 'जो उद्योग आएंगे, वे यहां टिकेंगे और स्थानीय युवाओं को रोजगार देंगे या नहीं?' खनिज संपदा को विकास का आधार बनाना है तो उद्योग और प्रशासन के बीच विश्वास का वातावरण तैयार करना होगा। तभी झरी जामणी में औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय रोजगार के नए अवसरों का रास्ता खुल सकेगा।
झरी जामणी की धरती के नीचे खनिजों का भंडार है, लेकिन इसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय युवाओं को रोजगार के रूप में कितना मिल रहा है, यह अहम सवाल है। पर्याप्त स्थानीय रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण अनेक युवाओं को पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों की ओर रोजगार के लिए पलायन करना पड़ रहा है।