

Wardha Industrial Sector Crisis MIDC Plight: वर्धा जिले में बेरोजगारी दिन-ब-दिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। जिले में पांच MIDC होने के बावजूद बड़े और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट कार्यान्वित नहीं होने से सुशिक्षित युवाओं को रोजगार से वंचित रहना पड़ रहा है। जिले की पांचों MIDC में करीब 290 छोटे-बड़े प्रोजेक्ट कार्यान्वित बताए जाते हैं। इसके बावजूद पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होने से युवाओं में निराशा है।
औद्योगिक क्षेत्रों में कई प्लॉट आज भी खाली पड़े हैं। कुछ प्लॉट पर निर्माण कार्य कर उनका उपयोग केवल गोदाम के रूप में किया जा रहा है। उद्योग स्थापित करने के नाम पर कुछ लोगों ने प्लॉट प्राप्त कर लिए लेकिन वर्षों बाद भी वहां उद्योग शुरू नहीं हुए हैं।
दूसरी ओर, कई नए उद्यमी प्लॉट की मांग कर रहे हैं। वर्धा क्षेत्र में केवल 20 प्रतिशत उद्योग शुरु है। कारंजा में केवल इमारते खडी है, एक भी उद्योग यहां शुरु नहीं है।
नई MIDC के लिए यहां जमीन का अधिग्रहन हुआ है। परंतु आगे की प्रक्रिया ठंडेबस्तें में बताई गई। सरकार व प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार जिले में करीब 510 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र फैला हुआ है।
इसमें कारंजा में 11।60 हेक्टेयर, वर्धा में 214।05 हेक्टेयर, हिंगनघाट में 10।20 हेक्टेयर, समुद्रपुर में 15।47 हेक्टेयर तथा देवली में सर्वाधिक 257।74 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। सबसे अधिक प्रोजेक्ट वर्धा और देवली में कार्यान्वित बताए जाते हैं। पांचों एमआईडीसी में करीब 11 हजार रोजगार उपलब्ध होने की जानकारी है। बड़े प्रोजेक्टों के अभाव में जिले का औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है।
वर्धा जिला इंडस्ट्रीलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण हिवरे ने बताया कि वर्धा एमआईडीसी की स्थिति गंभीर है। उनके अनुसार करीब 40 प्रतिशत उद्योग बंद हैं, 20 प्रतिशत प्लॉट का उपयोग कबाड़ के गोदामों के रूप में किया जा रहा है, जबकि 20 प्रतिशत में कबाड़ की फैट्रियों संचालित हैं।
केवल 20 प्रतिशत क्षेत्र में विविध उद्योग शुरू हैं। उद्योगों को अपेक्षित सरकारी अनुदान नहीं मिल रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में नालियों और सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। प्रशासन की अनदेखी के कारण औद्योगिक क्षेत्र के विकास पर असर पड़ रहा है।
वर्धा जिले में अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं होने तथा बड़े उद्योगों का अभाव होने के कारण उच्चशिक्षित युवा पुणे, मुंबई सहित अन्य राज्यों के बड़े शहरों की ओर रोजगार के लिए रुख कर रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा परिवार से दूर रहकर अन्य शहरों और राज्यों में रोजगार कर रहे हैं। आजादी के 79 वर्ष बाद भी औद्योगिक क्षेत्र में जिला पिछड़ा होने पर युवाओं में नाराजगी और निराशा है।