Yavatmal News: आदिवासी विद्यार्थियों के खाने के पड़े लाले, झरी जामणी में मिड-डे मील योजना पर अनाज संकट

Mid-Day Meal Scheme: यवतमाल जिले की झरी जामणी तहसील में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड-डे मील) योजना अनाज की कमी से प्रभावित हो गई है। कई सरकारी स्कूलों में केवल 7-8 दिनों का खाद्यान्न शेष है।
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मिड-डे मील योजना(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Yavatmal Tribal Students: आदिवासी बहुल झरी जामणी तहसील में संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (मिड-डे मील) योजना अनाज की कमी के कारण गंभीर संकट से जूझ रही है। राज्य स्तर से खाद्यान्न की आपूर्ति समय पर नहीं होने के कारण कई सरकारी स्कूलों में केवल सात से आठ दिनों का ही अनाज बचा है। यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो हजारों विद्यार्थियों के सामने दोपहर के भोजन का संकट खड़ा हो सकता है।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के अधिकांश बच्चों के लिए मिड-डे मील केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि दिन का सबसे पौष्टिक भोजन होता है। ऐसे में खाद्यान्न की आपूर्ति रुकने से स्कूल प्रशासन चिंता में है। कई स्कूल शेष बचे स्टॉक के सहारे योजना चला रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर एक स्कूल से दूसरे स्कूल में अनाज भेजकर व्यवस्था बनाए रखी जा रही है।

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मिड-डे मील योजना में अनाज की भारी कमी

कहीं-कहीं सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से उधार अनाज लेकर भोजन तैयार किया जा रहा है, तो कुछ गांवों में जनसहयोग से योजना जारी रखने का प्रयास हो रहा है। वर्ष 1995 से संचालित यह योजना विद्यार्थियों की स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने, कुपोषण कम करने और ड्रॉपआउट रोकने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। लेकिन खाद्यान्न आपूर्ति में आई बाधा ने इस योजना की निरंतरता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला स्तर से कई बार मांग भेजे जाने के बावजूद राज्य स्तर से पर्याप्त अनाज उपलब्ध नहीं हो सका है, जिससे स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

आदिवासियों के लिए पेट भर भोजन का सवाल

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के लिए यह महज आपूर्ति का प्रशासनिक विषय हो सकता है, लेकिन एक गरीब और आदिवासी छात्र के लिए यह उसके दिन के एक वक्त के भोजन का सवाल है। इसलिए विद्यार्थियों के हित को देखते हुए सरकार को तत्काल खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि उनके पोषण और शिक्षा पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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