Yavatmal Railway Station: यवतमाल रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब 2 लाख रुपये तक की रेल टिकट बुकिंग होती है। इस हिसाब से रेलवे को हर महीने लगभग 70 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद स्टेशन का विकास ठप है और स्टेशन परिसर का अधिकांश भाग पिछले लगभग आठ वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। बुकिंग मास्टर जगनलाल मीणा के अनुसार, स्टेशन पर टिकट बुकिंग का पूरा कार्य केवल दो कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों के टिकट बुक होने और भारी ट्रांजेक्शन के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार रहता है। यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बुकिंग कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है। यहां पर केवल दो ही कर्मचारी तैनात है। जबकि यहां पर तीन कर्मचारियों की आवश्यकता है। यहीं नहीं तो यहां पर सुरक्षा के लिहाज से भी आवश्यक प्रबंध करना जरूरी है।
रात के समय स्टेशन परिसर में शराबियों और जुआरियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे यात्रियों में भय का माहौल रहता है। वहीं, कई बार स्ट्रीट लाइटें भी बंद रहती हैं। जिससे अंधेरा होने के कारण समस्याएं और बढ़ जाती हैं। ब्रिटिशकालीन विरासत माने जाने वाले यवतमाल रेलवे स्टेशन का अब तक कायाकल्प नहीं हो सका है। स्टेशन भवन, परिसर, प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की लंबे समय से मांग की जा रही है।
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रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन से हर महीने लाखों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद उसकी अनदेखी न की जाए। बंद पड़े स्टेशन परिसर को जल्द शुरू किया जाए, स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जाए, अतिरिक्त कर्मचारियों और सुरक्षा बल की नियुक्ति की जाए तथा यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।