प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया) 
यवतमाल

यवतमाल में स्मार्ट मीटर जांच अभियान पर उठे सवाल, नागरिकों ने एसपी से मांगा स्पष्टीकरण

Smart Meter Inspection: यवतमाल के वार्ड नंबर 16 में महावितरण द्वारा स्मार्ट मीटर जांच अभियान के दौरान तैनात भारी पुलिस बल को लेकर नागरिकों में भ्रम है, जिसके स्पष्टीकरण के लिए एसपी को ज्ञापन सौंपा।

केतकी मोडक

Question Raised Over Smart Meter Inspection Drive in Yavatmal: यवतमाल शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में महावितरण (MSEDCL) द्वारा चलाए जा रहे स्मार्ट मीटर लगाने, मीटरों की क्रॉस-चेकिंग और बिजली चोरी के खिलाफ विशेष अभियान को लेकर अब एक नया प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई के दौरान महावितरण की टीम के साथ तैनात किए गए भारी पुलिस बंदोबस्त को लेकर आम नागरिकों के मन में गहरा भ्रम, शंकाएं और विभिन्न प्रकार की चर्चाएं पैदा हो गई हैं।

इसी संवेदनशील विषय पर वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने और अपनी शंकाओं के समाधान के लिए शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीधे जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर उन्हें एक लिखित निवेदन सौंपा है।

सरकारी काम में बाधा डालना मकसद नहीं,

नागरिकों द्वारा यवतमाल पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए निवेदन में साफ तौर पर कहा गया है कि शहर के वार्ड क्रमांक 16 सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जब महावितरण की टीम जांच के लिए पहुंची, तो उनके साथ भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। अचानक इतनी बड़ी तादाद में पुलिस की तैनाती देखकर आम नागरिकों में भय और भ्रम का माहौल बन गया। प्रतिनिधिमंडल ने यवतमाल पुलिस प्रशासन के समक्ष यह पूरी तरह स्पष्ट किया है कि उनका इरादा किसी भी सरकारी विभाग की वैधानिक कार्रवाई या जांच में बाधा उत्पन्न करना बिल्कुल नहीं है। वे केवल इस बात की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया को समझना चाहते हैं कि एक सामान्य मीटर जांच अभियान के लिए इतने बड़े सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। नागरिकों ने सीधे तौर पर मांग की है कि इस अभियान के दौरान पुलिस बंदोबस्त उपलब्ध कराने के ठोस और वास्तविक कारणों की जानकारी जनता के साथ साझा की जाए।

क्या कानून-व्यवस्था बिगड़ने का था इनपुट?

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से तीखे लेकिन मर्यादित सवाल पूछते हुए यह भी जानना चाहा है कि क्या पुलिस विभाग के खुफिया तंत्र के पास संबंधित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बिगड़ने या किसी हिंसक विरोध से जुड़ी कोई विशेष पूर्व सूचना या गुप्त रिपोर्ट थी, जिसके आधार पर इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई? इसके साथ ही नागरिकों ने यह भी पूछा है कि महावितरण के ऐसे नियमित और तकनीकी अभियानों के दौरान पुलिस विभाग की असल कानूनी भूमिका, अधिकार और जिम्मेदारियां क्या तय की गई हैं?

शहर में फैल रही गलतफहमियों और अफवाहों को रोकने के लिए प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस के आला अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त और शांतिपूर्ण समन्वय बैठक (चर्चा सत्र) आयोजित करने की पुरजोर मांग की है। नागरिकों का कहना है कि इस संवाद का एकमात्र उद्देश्य जमीनी हकीकत को जानना और जनता के मन में व्याप्त अविश्वास को दूर करना है।

प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस विभाग के प्रति जताया सम्मान

इस पूरे विवाद के बीच, निवेदन सौंपने पहुंचे नागरिकों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने में यवतमाल पुलिस की सदैव अग्रणी भूमिका और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है और वे केवल प्रशासनिक पारदर्शिता की उम्मीद में उचित मार्गदर्शन चाहते हैं।

इस विशेष निवेदन को सौंपने वाले प्रमुख नागरिकों में अमजद खान अहमद खान, मोहम्मद सलीम मोहम्मद शकुर, परवेज अहेमद मसुदुल हसन, मुकदर अली शेर शाह, अकील रज्जाक शेख, एसके नसीर शेख सहित अन्य कई गणमान्य लोग शामिल थे, जिनके हस्ताक्षर इस ज्ञापन पर मौजूद हैं। अब देखना यह है कि नागरिकों की इस अनूठी शंका पर पुलिस प्रशासन और महावितरण की ओर से क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है।

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