VHP Garba Guidelines: महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया कार्यक्रमों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) की नई गाइडलाइन पर सियासी विवाद गहरा गया है। विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए “भारत में मुसलमानों के लिए जगह है” वाले बयान और VHP के रुख के बीच विरोधाभास बताते हुए सवाल उठाए हैं।
राजद सांसद मनोज झा ने तंज कसते हुए कहा कि लगता है मोहन भागवत अपना कुछ सामान अमेरिका में ही छोड़ आए हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि गरबा भारत की सांस्कृतिक परंपरा है और इसमें किसी धर्म के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती। तृणमूल कांग्रेस ने भी VHP की गाइडलाइन को सांप्रदायिक बताते हुए इसकी आलोचना की है।
मीडिया से बातचीत करते हुए राजद सांसद मनोज झा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि फडणवीस ने शासन का काम किसी और को सौंप दिया है, जैसे अब प्रशासन का काम वीएचपी देखेगी।
न्यूयॉर्क में संघ प्रमुख के भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शायद वह अपना कुछ सामान अमेरिका में ही भूल आए और उसके साथ ही वे बातें भी वहीं छूट गईं जो उन्होंने वहां कही थीं। उन्हें वह सामान वापस लाना चाहिए और अपने लोगों को समझाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कृपया इस देश के चरित्र के साथ छेड़छाड़ न करें।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि कौन कहता है कि मुसलमान गरबा नहीं खेल सकते। विश्व हिंदू परिषद के लोग, जो हाल ही में खुद को धार्मिक मामलों का जानकार बताने लगे हैं, ऐसे बयान दे रहे हैं। 'गरबा' को देश की परंपरा बताते हुए राउत ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई और सांस्कृतिक इतिहास में मुसलमानों का भी अहम योगदान रहा है।
राजद सांसद की बात से सहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि मोहन भागवत विदेश जाते हैं और कहते हैं कि हमारे देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। चाहे वह राजनीतिक, सांस्कृतिक या धार्मिक हो।
उन्होंने यह भी कहा था कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से निकाल देना चाहिए, वह हिंदू नहीं रह जाता और यहां उनसे जुड़े लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं। इसके अलावा, राउत ने संघ प्रमुख से इस मुद्दे पर टिप्पणी करने को कहा कि भारत और न्यूयॉर्क में अलग-अलग बयान देने से काम नहीं चलेगा।
वहीं वीएचपी के इस कदम का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि यह पूरी तरह से सांप्रदायिक है। गरबा एक सांस्कृतिक त्योहार है और इसमें कोई भी हिस्सा ले सकता है। हम गरबा पर लगी इस रोक की कड़ी निंदा करते हैं।