वर्षामापी यंत्र फोईल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)  
यवतमाल

यवतमाल में मानसून मॉनिटरिंग तेज, 110 रेनगेज मशीनों से हर बूंद का होगा सटीक रिकॉर्ड

Rain Gauge Machine: यवतमाल जिले के 110 राजस्व मंडलों में स्वचालित वर्षामापक यंत्र सक्रिय कर दिए गए हैं। स्कायमेट के सहयोग से चलने वाली यह प्रणाली अतिवृष्टि, सूखा और फसल नुकसान का सटीक आकलन करेगी।

केतकी मोडक

Yavatmal Rain Gauge Monitoring: मानसून के दौरान वर्षा की हर बूंद का सटीक रिकॉर्ड रखने तथा कृषि, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यवतमाल जिले के 110 राजस्व मंडलों में स्वचालित वर्षामापक (रेनगेज) यंत्र सक्रिय किए गए हैं। कृषि विभाग और स्कायमेट वेदर सर्विसेज के संयुक्त सहयोग से स्थापित इस आधुनिक प्रणाली के माध्यम से वर्षों की त्वरित और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त हो रही है।

बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा की स्थिति में कहीं तेज बारिश तो कहीं सूखे जैसी परिस्थितियां बन रही हैं। ऐसे में गांव-स्तर पर वास्तविक वर्षा का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक राजस्व मंडल में वर्षामापक यंत्र लगाए गए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से प्रतिदिन सुबह 10 बजे पिछले 24 घंटे में हुई वर्षा का मापन किया जाता है और उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।

प्राप्त आंकड़ों को यवतमाल जिला प्रशासन तक भेजा जाता है, जहां मंडलवार वर्षा के आधार पर तहसील और जिले की औसत वर्षा निर्धारित की जाती है। इन आंकड़ों का उपयोग सूखा, ओला सूखा, अतिवृष्टि, फसल क्षति तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आकलन में किया जाता है।

मिलीमीटर में मापी जाती है बारिश

कृषि और प्रशासन दोनों के लिए वर्षों का सही आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। फसलों की स्थिति, सूखा या अतिवृष्टि की घोषणा तथा राहत योजनाओं का निर्धारण वर्षा के आंकड़ों पर निर्भर करता है। वर्षा की मात्रा को प्रति वर्ग मीटर लीटर अथवा मिलीमीटर (मिमी) इकाई में मापा जाता है। वर्तमान में मेट्रिक प्रणाली के तहत मिलीमीटर को मानक इकाई के रूप में उपयोग किया जाता है। यह भई पढ़ें:- महाराष्ट्र में Drone-Robotics Industry को मिलेगा बढ़ावा, कैबिनेट ने मानव रहित प्रणाली नीति-2026 को दी मंजूरी

प्रत्येक मंडल में

जिले के 16 तहसील में कुल 110 राजस्व मंडल हैं और प्रत्येक मंडल में वर्षामापक यंत्र स्थापित किए गए हैं। इससे किसानों को वास्तविक वर्षा के आधार पर राहत, मुआवजा और कृषि संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। इस आधुनिक वर्षामापन व्यवस्था से जिले में मौसम संबंधी और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में प्रशासन को बड़ी मदद मिलेगी।

तहसील अनुसार वर्षामापक यंत्रों की संख्या

तहसील वर्षामापक यंत्रों की संख्या
यवतमाल 10
पुसद 9
उमरखेड़ 9
वणी 9
दारव्हा 7
घाटंजी 7
केलापुर 7
महागांव 7
रालेगांव 7
आर्णी 6
कलंब 6
नेर 6
बाभुलगांव 5
दिग्रस 5
मारेगांव 5
झरी जामणी 5
कुल योग 110

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