

Yavatmal Nurses DHO Office Protest: यवतमाल जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली अंशकालिक महिला परिचारिकाओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। शासन स्तर पर मानदेय वृद्धि का आधिकारिक आदेश जारी होने के बावजूद यवतमाल जिला प्रशासन द्वारा भुगतान में की जा रही टालमटोल के खिलाफ सोमवार को 'आयटक महाराष्ट्र राज्य स्वास्थ्य विभाग अंशकालिक महिला परिचारिका संघ' के बैनर तले जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) कार्यालय पर एक विशाल मोर्चा निकाला गया। इस आंदोलन के चलते जिला परिषद मार्ग से लेकर इंदिरा संकेत मार्केट तक का पूरा इलाका गूंज उठा।
यह विशाल मोर्चा यवतमाल जिला परिषद मार्ग से शुरू होकर शहर के प्रमुख व्यस्ततम चौकों संविधान चौक, दत्त चौक, नेताजी मार्केट, शहर पुलिस स्टेशन और इंदिरा मार्केट से होते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के प्रांगण में पहुंचा। मोर्चे का नेतृत्व आयटक के जिला कार्याध्यक्ष दिवाकर नागपुरे ने किया। आंदोलन के दौरान महिला परिचारिकाओं ने अपने हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर प्रशासन विरोधी और अपनी न्यायसंगत मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुभाष ढोले के माध्यम से सरकार को सौंपा गया।
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिवाकर नागपुरे ने बताया कि अंशकालिक महिला परिचारिकाओं के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के लिए संगठन लंबे समय से संघर्ष कर रहा था। इसी के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 17 मार्च 2026 को मानदेय वृद्धि से जुड़ा शासन निर्णय (GR) जारी किया था। इस सरकारी निर्णय के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से परिचारिकाओं के मानदेय में प्रति माह 3,000 रुपये की सीधी बढ़ोतरी कर कुल 6,000 रुपये मानदेय देने का अनिवार्य प्रावधान किया गया है। संघ का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा इस वृद्धि के लिए अतिरिक्त निधि (फंड) मंजूर और वितरित किए जाने के बावजूद यवतमाल जिले में अब तक परिचारिकाओं को न तो बढ़ा हुआ मानदेय दिया गया है और न ही बकाया राशि (एरियर) का भुगतान किया गया है।
परिचारिकाओं की प्रमुख मांगों में नियमित आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर है। उन्होंने मांग की है कि 1 अप्रैल 2026 से बढ़े हुए मानदेय का बकाया सहित भुगतान तुरंत किया जाए और हर महीने की 10 तारीख तक मानदेय का नियमित वितरण सुनिश्चित हो। साथ ही, पूर्णकालिक कार्य लेने के बावजूद अंशकालिक दर्जा रखने की विसंगति को दूर कर उन्हें जॉब कार्ड दिए जाएं और जिला परिषद सेवा में स्थायी रूप से शामिल किया जाए।
इसके अलावा परिचारिकाओं ने न्यूनतम वेतन कानून के अनुसार 26,000 रुपये प्रतिमाह वेतन देने की पुरजोर मांग की है। स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी अन्य सेवा शर्तों को सुधारने पर जोर देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए तथा उनके वारिसों को सेवा में अवसर दिया जाए। इसके साथ ही, गणवेश एवं पहचान पत्र के लिए वार्षिक निधि उपलब्ध कराने तथा जिन परिचारिकाओं को अब तक ये नहीं मिले हैं, उन्हें तत्काल वितरित करने की मांग की गई है।
इस संघर्षी मोर्चे में यवतमाल जिले के कोने-कोने से आईं सैकड़ों अंशकालिक महिला परिचारिकाएं शामिल हुईं। आंदोलन में दिवाकर नागपुरे सहित प्रतीभा ठाकरे, वैशाली निंबतें, अर्चना चिकटे, वर्षा तोडसाम, निर्मला कोवे, गंगु तोडसाम, गीता कुडमेथे, ज्योती राठोड, शीला रोकडे, संगीता पिस्तुलकर, लताबाई सांगले, रूख्मीनी सुर्यवंशी, सुलोचना अन्नछत्रे, आशीया कांबले, गोदावरी काकडे और प्रतिभा सुकलकर आदि प्रमुखता से शामिल रहीं।