Yavatmal District Central Cooperative Bank Election: यवतमाल जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में एक उम्मीदवार के संचालक पद के 10 वर्ष के कार्यकाल की सीमा और पात्रता का मामला अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
मुंबई हाईकोर्ट की नागपूर खंडपीठ ने 1 अक्टूबर को आरबीआई को 22 सितंबर को प्रस्तुत किए गए निवेदन पर तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते आरबीआई द्वारा लातूर में 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा को लेकर की गई कार्रवाई की तर्ज पर यवतमाल में भी उसी कानूनी मापदंड के आधार पर निर्णय होने की उम्मीद उमरखेड गुट के महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार राम देवसरकर ने व्यक्त की है।
इस मामले में संबंधित उम्मीदवार ने 21 दिसंबर 2007 से 10 सितंबर 2020 तथा 4 जनवरी 2021 से 3 जनवरी 2026 तक संचालक पद संभाला है। इस पृष्ठभूमि में लगातार 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा के नियम को लेकर चुनाव निर्णय अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई गई थी। पर यह आपत्ति खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। न्यायालय ने चुनाव प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप नहीं करते हुए आरबीआई को इस मामले पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
राम देवसरकर के दावे के अनुसार, आरबीआई के 'रूरल को-ऑपरेटिव बैंक गवर्नेस डायरेक्शन, 2025' के नियमों के मुताबिक संचालक पद के 10 वर्ष के कार्यकाल की गणना करते समय तीन वर्ष से कम अवधि के अंतराल को अलग नहीं माना जाता। इस नियम के अनुसार संबंधित उम्मीदवार लगातार 17 वर्ष से अधिक समय तक संचालक पद पर रहे हैं। इसलिए लातूर की तर्ज पर यवतमाल के मामले में भी समान कानूनी मापदंड लागू कर आरबीआई द्वारा आपत्तिकर्ता के पक्ष में सकारात्मक निर्णय दिए जाने की उम्मीद राम देवसरकर ने जताई है। अब सहकार क्षेत्र का ध्यान आरबीआई के अंतिम निर्णय की ओर लगा हुआ है।
इससे पहले लातूर जिला बैंक में संचालक तथा राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील समेत आठ संचालकों पर इसी प्रकार 10 वर्ष की कार्यकाल सीमा को लेकर आरबीआई ने कार्रवाई की थी। इनमें सात संचालकों ने इस्तीफा दे दिया था, जबकि बाबासाहेब पाटिल को संचालक पद से हटा दिया गया था। यह कार्रवाई बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 की धारा 10-अ और धारा 56 के तहत की गई थी।