Umar Khed Teachers Organization: शिक्षकों को अशैक्षणिक कार्यों से पूरी तरह मुक्त कर केवल अध्यापन कार्य करने दिया जाए और बार-बार उन पर विभिन्न अशैक्षणिक कार्यों का बोझ न डाला जाए। इस प्रमुख मांग को लेकर यवतमाल जिला परिषद प्राथमिक शिक्षक संगठन की ओर से उमरखेड़ के समूह विकास अधिकारी को हाल ही में ज्ञापन सौंपा गया ।
ग्रामसभा के पर्यवेक्षण कार्यों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करने के शासन के निर्णय का संगठन ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों पर लगातार विभिन्न अशैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जिससे प्रत्यक्ष रूप से कक्षा अध्यापन और विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है ।
ग्रामसभा पर्यवेक्षक के काम की भी बढ़ी जिम्मेदारी !
शिक्षकों को लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रखा जा रहा है । एसआईआर, जनगणना जैसे कार्यों से परेशान शिक्षकों पर अब ग्राम पंचायत अधिकारियों द्वारा ग्रामसभाओं के बहिष्कार के बाद ग्रामसभा पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी भी डाली जा रही है। संगठन ने आरोप लगाया कि शासन शिक्षकों को अतिरिक्त कार्यों का बोझ उठाने वाला कर्मचारी समझ रहा है ।
संगठन ने मांग की है कि भविष्य में शिक्षकों पर इस तरह के अनावश्यक अशैक्षणिक कार्य न थोपे जाएं । इससे शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है । शासन को तुरंत इस प्रक्रिया को रोककर शिक्षकों को केवल अध्यापन कार्य करने की अनुमति देनी चाहिए।
इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने गुट विकास अधिकारी किरण कोळपे से विस्तृत चर्चा कर शिक्षकों की भावनाएं प्रशासन तक पहुंचाईं। शिक्षकों को अशैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग को लेकर जिला उपाध्यक्ष आनंद कुंबरवार, तालुका अध्यक्ष परशराम कर्णेवाड, सचिव नारायण गारशेटवाड, मार्गदर्शक विजय मिराशे, कार्याध्यक्ष गोविंद साबळे, उपाध्यक्ष शिवाजी पवार, संगठन प्रमुख विजय कोकरे, महादेव वाघ, बाबाराव इटकरे, रमेश विनकरे, अमोल पाईकराव, कृष्णा पाचकोरे, रामदास केंद्रे, संतोष घुगे, सुनील गीते, जवरे, किशोर कदम, दिलीप जाधव, सुदर्शन नरवाडे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।