पुसद नगर परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया) 
यवतमाल

नगराध्यक्ष की दौड़: पुसद में महायुति टूटी, MVA एकजुट, नाईक परिवार की सीट पर 5 दावेदारों में टक्कर

Yavatmal News: पुसद नगरपालिका चुनाव में नाइक परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा, शिवसेना और कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवारों से कड़ा मुकाबला बना है, जबकि वंचित बहुजन आघाड़ी भी वोट समीकरण बदल सकती है।

आकाश मसने

Pusad Nagar Parishad Election: विदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व बनाए रखने वाली पुसद नगरपालिका की चुनावी दौड़ इस बार यवतमाल जिले में सबसे ध्यान आकर्षित कर रही है। जब सीधे राज्य मंत्री की पत्नी नगराध्यक्ष पद की दौड़ में उतरीं, तो यह सीट ‘प्रेस्टीज पॉइंट’ बन गई। लेकिन महायुति के भीतर भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने दोस्ताना मुकाबले के लिए मैदान में उतरने का फैसला किया है।

वहीं महाविकास आघाड़ी के तीनों दल पूरी तरह से एकजुट होकर तैयार हैं। इसके चलते पुसद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे इंद्रनील नाईक के लिए पुसद नगरपालिका अपने पंखों तले लेना अब आसान नहीं रह गया है। करीब एक साल पहले पुसद विधानसभा क्षेत्र से इंद्रनील नाईक ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। उन्हें राज्य सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय का दर्जा मिला।

मंत्री इंद्रनील नाईक के सामने चुनौती

विदर्भ में अपवाद छोड़कर, राष्ट्रवादी कांग्रेस का अस्तित्व दिखाने का श्रेय पुसद के नाईक परिवार को ही जाता है। इसलिए इंद्रनील नाईक को राज्य मंत्री के पद के साथ-साथ गोंदिया का पालकमंत्री भी बनाया गया। अब पार्टी की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए उन्हें पुसद नगरपालिका जीतने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। नगरपालिका की 31 सीटों पर उनकी पार्टी ने उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं नगराध्यक्ष पद के लिए उन्होंने अपनी पत्नी मोहिनी नाईक को टिकट दिया है। पुसद की राजनीति में ‘नाईक बंगला’ शब्द का ऐतिहासिक महत्व रहा है। लेकिन इस बार नाईक परिवार को कड़ा मुकाबला मिल रहा है। नगराध्यक्ष पद के लिए पांच बराबर के उम्मीदवार हैं। नाईक परिवार के सामने भाजपा ने निखिल चिद्दरवार, शिवसेना (शिंदे गुट) ने अनिल ठाकुर और कांग्रेस ने महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार डॉ. मोहम्मद नदीम को मैदान में उतारा है।

निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में

इसके अलावा, पूर्व में नाईक परिवार के साथ ही पालिका की सत्ता में रहे राजू दुधे ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नगराध्यक्ष पद की दावेदारी पेश की है। इससे साफ है कि नाईक परिवार केवल ‘बंगला’ के ऐतिहासिक प्रभाव के आधार पर जीत नहीं पायेगा।

राज्य में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी साथ हैं, लेकिन पुसद में ये दोनों पार्टियां एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं। भाजपा के प्रचार के लिए खुद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले यहां आए और माहौल बनाया। भाजपा संगठन स्तर पर पुसद को एक स्वतंत्र जिला मानता है, इसलिए यह सीट भाजपा के लिए बेहद प्रतिष्ठित है।

भाजपा की पुसद जिलाध्यक्ष आरती फुफाटे ने शहर में मतदाताओं की मजबूत तैयारी की है।कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. मोहम्मद नदीम केंद्रीय कार्यकारिणी में भी जुड़े हुए हैं और उनके समर्थन में पूर्व विधायक डॉ. वजाहत मिर्झा भी हैं।

मित्रपक्ष ही बन गया पहला विरोधी

राज्यमंत्री नाईक के सामने चुनौतियां है। मित्रपक्ष खुद विरोधी के रूप में खड़ा, भाजपा की मजबूत प्रचार मशीनरी और मंत्रियों के दौरे, पारिवारिक प्रभाव पर आधारित इतिहास, निर्दलीय उम्मीदवारों से मत विभाजन का खतरा, टूटी हुई महायुती, लेकिन मजबूत महाविकास आघाड़ी रहेगी।

‘वंचित’ किसको समर्थन देंगे?

एक साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में पुसद में वंचित बहुजन आघाड़ी ने स्थापित पार्टियों को कड़ा मुकाबला दिया था। वंचित के माधव वैद्य ने तीसरे स्थान पर आकर महत्वपूर्ण वोट हासिल किए थे। अब पुसद नगरपालिका चुनाव में भी वंचित बहुजन आघाड़ी ने आठ उम्मीदवार उतारे हैं। इससे स्थापित उम्मीदवारों के मतों में असर पड़ेगा।

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