शक्तिपीठ महामार्ग के लिए यवतमाल में जनसुनवाई (सौजन्य-नवभारत/सोशल मीडिया) 
यवतमाल

यवतमाल के 72 गांवों से गुजरेगा 'शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे', जनसुनवाई में किसानों ने रखीं अपनी शर्तें

Shaktipeeth Expressway Yavatmal: शक्तिपीठ महामार्ग को लेकर यवतमाल में जनसुनवाई; पर्यावरण प्रबंधन के लिए ₹255 करोड़ का प्रावधान। जिलाधिकारी विकास मीना ने किसानों की मांगों पर दिए निर्देश।

प्रिया जैस

Wardha-Yavatmal Expressway Package: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी और बहुचर्चित महाराष्ट्र शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे परियोजना के संबंध में शुक्रवार को जिलाधिकारी विकास मीना की अध्यक्षता में पर्यावरण विषयक सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित की गई। यह जनसुनवाई राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) की ओर से महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय चंद्रपुर के माध्यम से यवतमाल के संदीप मंगलम् सभागार में शुक्रवार को आयोजित की गई थी।

इसमें प्रदूषण नियंत्रण मंडल, एमएसआरडीसी के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। जनसुनवाई के दौरान किसानों ने कई समस्याएं और मांगें सामने रखीं। किसानों ने कहा कि महामार्ग के निर्माण से पानी के निकास की समस्या के कारण खेती को नुकसान हो सकता है, इसलिए उचित जलनिकासी की व्यवस्था की जाए।

साथ ही खेतों तक पहुंचने के लिए एप्रोच रोड, सड़क के दोनों ओर नालियां, बरसात के समय नदी-नालों के पानी से बचाव के लिए बांध और परियोजना प्रभावित खेती के लिए पानी की व्यवस्था करने की मांग की गई।

जिला प्रशासन बरत रहा पूरी सावधानी

इन मांगों पर एमएसआरडीसी की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण) नरेंद्र टोके ने जानकारी देते हुए बताया कि पानी की निकासी और नदियों पर बांध बनाने जैसे मुद्दों का अध्ययन कर परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा किसानों को ‘खेत तालाब’ देने की भी योजना बनाई गई है। आम नागरिकों और किसानों की आवाजाही के लिए आवश्यक स्थान भी छोड़ा गया है। जिलाधिकारी विकास मीना ने कहा कि इस परियोजना से किसी के साथ अन्याय न हो और कोई भी वंचित न रहे, इसके लिए जिला प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है।

पर्यावरण प्रबंधन के लिए 255 करोड़ की व्यवस्था

महामार्ग के निर्माण के दौरान वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण की संभावनाओं को देखते हुए विभिन्न उपाय किए जाएंगे। परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले पेड़ों के बदले एमएसआरडीसी की ओर से सड़क के दोनों किनारों और मध्य भाग में लगभग 2 लाख 5 हजार पेड़ों का रोपण किया जाएगा। परियोजना के तहत यवतमाल जिले में पर्यावरण प्रबंधन के लिए 255 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

ऐसा है शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना

एमएसआरडीसी द्वारा बनाई जा रही महाराष्ट्र शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना चार चरणों में पूरी की जाएगी और यह राज्य के 13 जिलों से होकर गुजरेगी। पहले चरण में वर्धा–यवतमाल पैकेज-1 के तहत यवतमाल जिले के कलंब, यवतमाल, घाटंजी, आर्णी, महागांव और उमरखेड़ तालुका से होकर 136.73 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा।

इस परियोजना में 72 गांव शामिल हैं और करीब 1417 हेक्टेयर सरकारी, निजी और वन भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। इस पैकेज की अनुमानित लागत 11,104 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य के दौरान लगभग 1400 मजदूरों को रोजगार मिलने की संभावना है। यह महामार्ग आगे चलकर 'हिंदू हृदयसम्राट बालासाहब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग से भी जोड़ा जाएगा'।

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