Kinwat Tribal Development Project: विधायक भीमराव केराम ने विपक्षियों को जवाब देते हुए कहा कि एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय में धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मेरे इस्तीफे की मांग की गई है। मैं इस पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय और गहन जांच का पूर्ण समर्थन करता हूं, ताकि मामले के वास्तविक तथ्य जनता के सामने आ सकें। 16.37 करोड़ की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के संबंध में 280 चेकों का उल्लेख किया जा रहा है।
संबंधित सक्षम अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए कि इन लेन-देन में वास्तव में किसकी भूमिका थी, किस स्तर पर मंजूरी दी गई, धनराशि का उपयोग कहां किया गया और पूरे वित्तीय लेन-देन की श्रृंखला क्या रही। केवल किसी एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होने से यह मान लेना उचित नहीं होगा कि मामला समाप्त हो गया है। जांच के दौरान यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
दोषी व्यक्ति को उसके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना किसी प्रकार का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक कारणों से किसी जनप्रतिनिधि को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।
केवल आरोपों के आधार पर मेरा इस्तीफा मांगना, जबकि अभी तक किसी आधिकारिक जांच में इन वित्तीय लेन-देन में मेरी प्रत्यक्ष संलिप्तता सामने नहीं आई है, जनता को गुमराह करने जैसा है। मेरा स्पष्ट मत है कि आदिवासी समुदाय के विकास के लिए आने वाली प्रत्येक राशि का उचित और पारदर्शी उपयोग होना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर फोरेंसिक ऑडिट तथा धनराशि के संपूर्ण लेन-देन की जांच का पूर्ण समर्थन करता हूं।
किनवट-माहूर आदिवासी अधिकार कोष के संबंध में वास्तविक सच्चाई सामने आनी चाहिए, लेकिन सच्चाई सामने लाने का माध्यम दस्तावेज, जांच-पड़ताल और कानूनी प्रक्रिया होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप और दबाव की राजनीति।
मैं निष्पक्ष जांच का पुरजोर समर्थन करता हूं और चाहता हूं कि जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आए तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। सार्वजनिक विकास के मुद्दों का राजनीतिकरण करने के बजाय हम सभी को आदिवासी समुदाय के अधिकारों और विकास के लिए पारदर्शिता के साथ खड़ा होना चाहिए।