Yavatmal Water Crisis (फोटो-सोशल मीडिया)  
महाराष्ट्र

अच्छी बारिश के बाद भी यवतमाल में जल संकट की आहट, 877 गांवों के लिए 15 करोड़ की कार्य योजना तैयार

Yavatmal News: यवतमाल में तापमान बढ़ते ही जल संकट गहराने लगा है। प्रशासन ने 877 गांवों के लिए 15 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। जलाशयों में पानी होने के बावजूद वाष्पीकरण और बढ़ती गर्मी ने चिंता बढ़ा दी है।

रूपम सिंह

Yavatmal Water Crisis: यवतमाल में इस वर्ष अच्छी बारिश होने के बावजूद अब तापमान में बढ़ोतरी के साथ जलाशयों का पानी तेजी से वाष्पीकृत होने लगा है और जिले में पानी संकट की आहट महसूस की जा रही है। रविवार से शुरू हुए मार्च महीने ने पहले ही दिन 29 डिग्री तापमान दर्ज कराया, जबकि सोमवार को यह 30 डिग्री तक पहुंच गया। बढ़ती गर्मी को देखते हुए गांवों में इस साल पानी की किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है।

जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जल समस्या स्थायी रूप से हल करने के लिए अब तक कई योजनाएं लागू की गई और करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद हर साल गर्मी आते ही पानी संकट की स्थिति बन जाती है। जिला प्रशासन ने गर्मी शुरू होने से पहले ही कार्ययोजना तैयार कर ली थी। मार्च महीने के आगमन के साथ प्रशासन सतर्क हो गया है। हर वर्ष गर्मियों में जिले के कई हिस्सों में गंभीर जल संकट उत्पन्न होता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून, इस प्रकार तीन चरणों में कार्ययोजना तैयार की है।

मार्च महीने में संभावित जल संकट को देखते हुए 256 गांवों में 290 उपाय प्रस्तावित किए गए हैं, जिन पर 8 करोड़ 33 लाख 11 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 171 गांवों के लिए 184 निजी कुओं का अधिग्रहण, 54 गांवों में नल योजनाओं की विशेष मरम्मत तथा 20 गांवों के लिए 20 टैंकरों की व्यवस्था शामिल है। गर्मी बढ़ते ही पानी बेचने वाले भी सक्रिय हो जाते हैं। 500 और 1000 लीटर की टंकियां लगाकर मनमाने दामों पर पानी बेचा जाता है। टैंकरों के किराए भी अत्यधिक होते हैं। ऐसे में पानी की बर्बादी रोकने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

अप्रैल से 621 गांवों में गहराएगा संकट

अप्रैल से जल संकट और गंभीर होने की संभावना है। 621 गांवों के लिए 750 उपाय प्रस्तावित किए गए है, जिन पर 6 करोड़ 81 लाख 50 हजार रुपये खर्च होंगे। इस दौरान 91 टैंकर तैनात किए जाएंगे तथा 619 गांवों के लिए 675 निजी कुओं का अधिग्रहण किया जाएगा।

पानी के लिए 15 करोड़ की कार्य योजना

 यवतमाल जिला परिषद ने संभावित जल संकट को देखते हुए 15 करोड़ 14 लाख 61 हजार रुपये की कार्ययोजना तैयार की है। मार्च से जून तक 877 गांवों के लिए 1040 उपाय प्रस्तावित हैं। अब तक पेयजल योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, फिर भी हर वर्ष गर्मी और जल संकट का समीकरण कायम है। हालांकि वर्तमान में जलाशयों में संतोषजनक पानी उपलब्ध है, लेकिन बढ़ती गर्मी और वाष्पीकरण के कारण आने वाले महीनों में स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की अपील की है।

वर्तमान जल भंडारण

  • पुसद तहसील का पूस प्रकल्प जलसंग्रह -61.56%
  • दिग्रस तहसील का अरुणावती प्रकल्प- 69.33%
  • बाभुलगांव तहसील का बेंबला प्रकल्प - 51.31%

सात मध्यम प्रकल्पों में जल की वर्तमान स्थिति

  • दारव्हा तहसील का गोकी - 71.18%
  • घाटंजी का वाघाडी - 70.79%
  • केलापुर का सायखेडा- 67.51%
  • महागांव का अधरपुस -81.62%
  • यवतमाल का बोरगांव- 52.34%
  • कारंजा का प्रकल्प -67.91%

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