Maharashtra Drought Central Team Inspection: महाराष्ट्र में इस साल खरीफ सीजन के दौरान कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई गंभीर सूखे की स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी टीम महाराष्ट्र पहुंच चुकी है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में फसलों को हुए भारी नुकसान, पेयजल के संकट और चारे की उपलब्धता की समीक्षा के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में यह दल 11 अक्टूबर तक राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत दौरा करेगा।
सूखे की स्थिति और खरीफ फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम के दौरे की शुरुआत वाशिम जिले से हुई। वाशिम जिला कलेक्टर कार्यालय में अमरावती संभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, कृषि विभाग, जल संसाधन और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान राज्य प्रशासनिक अधिकारियों ने केंद्रीय टीम के सामने वर्षा के आंकड़ों, सूखे की विभीषिका, अल नीनो के दुष्परिणामों और खरीफ फसलों की तबाही का एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही, स्थानीय निकायों के छोटे सिंचाई टैंकों, ग्रामीण जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति तथा आने वाले सात महीनों में संभावित जल व चारा संकट का अनुमानित खाका भी साझा किया गया।
बैठक के बाद केंद्रीय दल सुपखेला, जोगलदरी, कुपटा और मिर्जापुर गांवों में खेतों का दौरा कर फसल नुकसान का निरीक्षण करेगा। इस दौरान सूखे की गंभीरता, बारिश की कमी और फसल नुकसान का आंकलन किया जाएगा।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल के नेतृत्व में यह टीम 11 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा करेगी। आकलन में वर्षा, फसलों के नुकसान, पेयजल की उपलब्धता और चारे की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा।
अधिकतम क्षेत्रों को कवर करने के लिए केंद्रीय टीम को समूहों में विभाजित किया गया है, और क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय अधिकारी, विशेषज्ञ और राज्य सरकार के अधिकारी उनके साथ रहते हैं। केंद्रीय टीम में कृषि, जल संसाधन, ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, पशुपालन, वित्त, नीति आयोग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
राज्य के अधिकारियों ने केंद्रीय टीम को वर्षा, फसल क्षति, पेयजल की उपलब्धता और अल नीनो के प्रभाव के बारे में जानकारी दी। साथ ही, छोटे सिंचाई टैंकों, गांवों के जल स्रोतों और उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। राज्य के अधिकारियों ने अगले सात महीनों में संभावित स्थिति का आकलन भी प्रस्तुत किया।