मानोरा शासकीय नीम शासकीय दफ्तर में पान-खैनी की पिचकारियां (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
वाशिम

मानोरा शासकीय दफ्तर में खुलेआम कोटपा कानून का उल्लंघन, अधिकारियों की चुप्पी, गंदगी का आलम

KOPTPA Act: वाशिम जिले के अधिकांश कार्यालयों के की दीवारों पर पान और खैनी की पिचकारियां साफ नजर आती हैं। जबकि वहीं पर धूम्रपान और थूकना सख्त मना है जैसे बोर्ड भी लगे  हुए हैं।

आंचल लोखंडे

Washim News:  मानोरा यहां के पंचायत समिति, तहसील, ग्रामीण अस्पताल, शासकीय नीम शासकीय बैंक, मुख्यालय, विश्राम गृह आदि मुख्यालय में स्वच्छता और कानून का जिस तरह से माखौल उड़ाया जा रहा है, वह हैरान कर देने वाला है। अधिकांश कार्यालयों के की दीवारों पर पान और खैनी की पिचकारियां साफ नजर आती हैं। जबकि वहीं पर धूम्रपान और थूकना सख्त मना है जैसे बोर्ड भी लगे  हुए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां भी वाहन रुकता है, उसके पास ही कार्यालय के कर्मचारी खुलेआम खिड़की से थूकते देखे जा सकते हैं। जबकि यह पूरा क्षेत्र कोटपा कानून 2003 के अंतर्गत तंबाकू सेवन और थूकने के लिए प्रतिबंधित है।

'कोटपा' कानून के अनुसार, सरकारी दफ्तरों, स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों, सार्वजनिक परिवहन और रेस्टोरेंट आदि में धूम्रपान और थूकना प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर 200 तक का जुर्माना है। लेकिन सवाल यह है कि जब नियम तोड़ने वाले खुद सरकारी कर्मचारी हों, तो जुर्माना लगाएगा कौन। ऐसे सवाल भी उठ रहे हैं। अधिकांश अधिकारी के चेंबर के आसपास थूकदान रखे गए हैं, जिन पर साफ तौर पर चेतावनी लिखा है कि थूकना मना है, लेकिन उन पर भी थूक कर कानून का मजाक बनाया जा रहा है। इससे न सिर्फ परिसर गंदा हो रहा है बल्कि आम नागरिकों के सामने प्रशासन की छवि भी धूमिल हो रही है।

मानोरा शासकीय नीम शासकीय दफ्तर में पान-खैनी की पिचकारियां

सरकारी कर्मचारी जो आम लोगों को कानून का पालन सिखाते हैं, वही खुद पान-खैनी चबाकर कार्यालय की खिड़की से थूकते नजर आते हैं। यह दृश्य किसी भी आगंतुक को झटका देने के लिए काफी है। यह पूछने का वक्त है कि अगर सरकारी अफसर के दफ्तर के पास यह हाल है, तो बाकी दफ्तरों की क्या स्थिति होगी। जब खुद प्रशासनिक परिसर में यह गंदगी फैलाई जा रही है, तो फिर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। क्या यह कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या कोई ठोस कार्रवाई होगी या फिर केवल आदेश निकालकर खानापूर्ति की जाएगी। कानून तो है, पर अमल कहीं नजर नहीं आता सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान और थूकने वालों पर दंड का प्रावधान है, लेकिन  मानोरा मुख्यालयों  में ही इसका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

ग्रामीण अस्पताल में हालत खराब

पूरी तहसील को स्वस्थ रखने की दुहाई देने वाला ग्रामीण अस्पताल भी नागरिकों और कर्मचारियों के पीकदान का शिकार बना हुआ है। यहां के कार्यालय के प्रवेश व्दार वार्ड के समीप लोगों व्दारा जगह-जगह पीक दान के रुप में इस्तेमाल किया जाता है। जिसके कारण लोगों को स्वस्थ रखने वाले इस केंद्र की दीवारें भी रंगीन होती नजर आ रही है।

क्या है कोटपा कानून (2003)

भारत सरकार द्वारा लागू सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) का उद्देश्य तंबाकू सेवन पर नियंत्रण और नागरिकों का स्वास्थ्य सुरक्षा करना है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन वर्जित, स्कूल-कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू बिक्री पर प्रतिबंध, धूम्रपान/थूकने पर 200 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान, चेतावनी बोर्ड अनिवार्य है।

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