Wardha Administration Water Crisis: वर्धा जिले में इस वर्षसंभावित जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से कृति प्रारूप के अनुसार विभिन्न उपाय योजनाओं पर काम किया जा रहा है। बारिश का मौसम शुरू होने के बावजूद आवश्यकता वाले क्षेत्रों में जलसंकट से संबंधित कार्य जारी हैं। जिला प्रशासन के अनुसार कृति प्रारूप में जिले के करीब 1,015 गांवों में कुल 1,163 उपाययोजना के कार्य प्रस्तावित किए गए थे। इनमें से अब तक 513 गांवों में 560 कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। वहीं, 469 गांवों में लगभग 511 उपाययोजना के कार्य पूर्ण होने की जानकारी जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने दी है।
शेष कार्य आवश्यकता के अनुसार जारी हैं। जलसंकट से निपटने के लिए कृति प्रारूप में नई बोरवेल का निर्माण, नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत, बोरवेल की विशेष मरम्मत, अस्थायी नल जलापूर्ति योजना, टैंकर से पानी की आपूर्ति, निजी कुओं का अधिग्रहण, कुओं का गहरीकरण और गाद निकालने जैसे कार्य शामिल किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार 171 गांवों में 220 नई बोरवेल, 338 गांवों में 360 नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत, 11 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति, 339 गांवों में 356 निजी कुओं के अधिग्रहण तथा 150 गांवों में 210 कुओं के गहरीकरण के कार्य प्रस्तावित किए गए थे।
अब तक जिले में ग्राम पंचायत क्षेत्र में 511 उपाययोजना के कामों को अंजाम दिया गया है। इन कामों पर लगभग 26 करोड़ 50 लाख रुपये अनुमानित खर्च होने की जानकारी है, अभी भी प्रशासकीय मान्यता होने वाले कामों को पूर्ण करने पर जोर देने की जानकारी है।
प्रशासन की ओर से मंजूर किए गए कार्यों में से बड़ी संख्या में कार्य पूरे हो चुके है। वहीं बारिश का मौसम होते हुए भी कुछ हिस्सों में जलसंकट स्थिति बनी हुई है। उम्मीद के अनुसार बारिश न होने के कारण जिले के जलाशय अब तक शत-प्रतिशत नहीं भरे है। इसे ध्यान में रखते हुए भी काम शुरू है। ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अनुसार, जिन क्षेत्रों में अभी भी आवश्यकता है, वहां संबंधित उपाययोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और संभावित जलसंकट का प्रभाव कम करना है।