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वर्धा में शिक्षित बेरोजगार प्रकल्पग्रस्तों ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में उठक-बैठक लगाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया।
दोलन का नेतृत्व संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संजय धनाडे ने किया।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में स्नातक अंशकालीन संवर्ग की समांतर आरक्षण सीटें उपलब्ध नहीं होने पर उन पदों पर प्रकल्पग्रस्तों को नियुक्ति देने की मांग की गई।
Wardha Project Affected Protest: अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर शिक्षित बेरोजगार प्रकल्पग्रस्तों ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अनूठा प्रदर्शन किया। इस दौरान आंदोलन मंडप में उठक-बैठक लगाकर सरकार और प्रशासन के प्रति तीव्र निषेध व्यक्त किया गया। आंदोलन का नेतृत्व संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संजय धनाडे ने किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि अमरावती में आयोजित प्रकल्पग्रस्तों के सम्मेलन में दिए गए आश्वासन के बावजूद उनके आरक्षण में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई। इससे प्रकल्पग्रस्तों में भारी नाराजगी है। मांग की गई कि राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में स्नातक अंशकालीन संवर्ग के समांतर आरक्षण की सीटें उपलब्ध नहीं होने पर उन पदों पर प्रकल्पग्रस्तों को नियुक्ति दी जाए।
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के माध्यम से वर्ग अ, ब और क के पदों पर भी उन्हें अवसर दिया जाए, जबकि वर्ग ड के पद जिलाधिकारी कार्यालय की वरिष्ठता सूची से भरे जाएं। इसके अलावा नौकरी की आयु सीमा समाप्त हो चुके अथवा नौकरी करने के इच्छुक नहीं रहने वाले प्रकल्पग्रस्तों को प्रमाणपत्र जमा करने के बदले आजीविका के लिए एकमुश्त 50 लाख रुपए देने की मांग की गई।
आंदोलनकारियों ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए प्रकल्पग्रस्तों ने अपनी जमीन और घर-बार तक छोड़ दिए उनकी जमीन पर विकास कार्य हुए, लेकिन बदले में उन्हें अपेक्षित लाभ और रोजगार नहीं मिला। इसी पीड़ा को व्यक्त करते हुए आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि आखिर जमीन देकर उन्होंने क्या गलती की? इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार प्रकल्पग्रस्त शामिल हुए।