नदी लिंक प्रोजेक्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो) 
वर्धा

विदर्भ का सबसे बड़ा नलगंगा-वैनगंगा प्रोजेक्ट रुका, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर अटकी बात, जानें हालात

Nalaganga Vainganga Project: नलगंगा-वैनगंगा नदी जोड़ परियोजना को मंजूरी तो मिली, पर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू नहीं। 10 लाख एकड़ सिंचाई क्षमता वाली इस परियोजना पर गंभीर सवाल।

प्रिया जैस

Vidarbha Irrigation Project: विदर्भ के लिए महत्त्वाकांक्षी और सिंचाई की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नलगंगा-वैंगंगा नदी जोड़ परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होने वाली है। इस परियोजना के माध्यम से 10 लाख एकड़ भूमि सिंचाई के दायरे में आने वाली है।

सरकार ने परियोजना को मंजूरी भी दे दी है और निजी कंपनी के माध्यम से सर्वेक्षण का कार्य भी पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक परियोजना से संबंधित प्रस्ताव जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ है। परिणामस्वरूप, इस परियोजना के भूमि अधिग्रहण कार्य की शुरुआत कब होगी, इस पर प्रश्नचिन्ह बना हुआ है। वर्धा जिले में प्रस्तावित यह नदी जोड़ परियोजना विदर्भ की पानी समस्या का स्थायी समाधान मानी जा रही है।

427 किमी लंबी नहर

इसके तहत भंडारा जिले में वैंगंगा नदी पर स्थित गोसीखुर्द बांध का अतिरिक्त पानी 427 किमी लंबी नहर, पाइप लाइन और उपसा सिंचन तकनीक के माध्यम से बुलढाणा जिले की नलगंगा नदी में छोड़ा जाएगा। इससे वर्धा सहित अमरावती, अकोला और बुलढाणा जिलों की लगभग 10 लाख एकड़ भूमि सिंचाई क्षेत्र में आकर खेती और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के प्रमुख उद्देश्य

अब तक सूखे से जूझते क्षेत्रों में सालभर फसल उत्पादन संभव हो सकेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। विदर्भ के कई जिलों में वर्षों से चली आ रही पानी की कमी का स्थायी समाधान मिलेगा। कृषि क्षेत्र में स्थिरता आने से विदर्भ के समग्र आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी। दूसरे चरण में निम्न वर्धा परियोजना से काटेपूर्णा परियोजना तक 130.70 किमी लंबी नहर निर्माण का प्रस्ताव है। यह परियोजना महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़े सिंचन प्रकल्पों में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विदर्भ की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

परियोजना की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में परियोजना का हवाई व जमीनी सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और सरकार ने इसे औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग मिलने की भी उम्मीद जताई जा रही है। वर्धा जिला प्रशासन के अनुसार, सर्वेक्षण पूर्ण होने के बावजूद परियोजना से संबंधित प्रस्ताव अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्ताव मिलने के बाद ही बजट का प्रावधान होगा।

आमतौर पर तीन प्रतियों में प्रस्ताव प्राप्त होता है, जिसके बाद भूमि अभिलेख विभाग अंतिम नाप-खोज का सर्वे पूरा करता है। वर्धा जिले को इस परियोजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन अब तक जिले में भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसी कारण परियोजना को गति देने के लिए सरकार से गंभीरता से पहल करने की मांग जोर पकड़ रही है।

पॉइंटर

  • विदर्भ के लिए महत्त्वाकांक्षी परियोजना
  • सिंचाई के दायरे में आएगी 10 लाख एकड़ भूमि
  • गोसीखुर्द बांध का पानी नलगंगा नदी में छोड़ा जाएगा
  • 130.70 किमी लंबी नहर निर्माण का प्रस्ताव
  • परियोजना से जिले को बड़ा लाभ मिलने की संभावना

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