Hinganghat Municipal Council: सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली हक की राशि के लिए नगरपालिका के चक्कर काटने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर नगरपालिका के सेवानिवृत्त कर्मचारी दिलीप लक्ष्मण झोरे ने अनोखा आंदोलन शुरू कर दिया। उन्होंने मुख्याधिकारी के कक्ष के सामने गद्दा बिछाकर वहीं डेरा डाल दिया। इस आंदोलन से नगरपालिका प्रशासन का ध्यान लंबित भुगतान के मुद्दे की ओर आकर्षित हुआ है। दिलीप झोरे हिंगनघाट नगरपालिका में शिपाई के पद पर नियुक्त हुए थे।
पदोन्नति के बाद उन्होंने भंडार विभाग में लिपिक पद की जिम्मेदारी भी संभाली। 30 जून को वे सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी, भविष्य निर्वाह निधि सहित करीब 20 लाख रुपए की राशि उन्हें नगरपालिका से देय थी। बताया जा रहा है कि अब तक उन्हें केवल 4 लाख रुपए का भुगतान किया गया है, जबकि शेष 16 लाख रुपए अभी भी लंबित हैं।
इस राशि के लिए झोरे ने नगरपालिका प्रशासन से लगातार पत्राचार और संपर्क किया। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर आखिरकार उन्होंने मुख्याधिकारी के कक्ष के सामने गद्दा बिछाकर आंदोलन शुरू कर दिया। झोरे ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक उनकी शेष हक की राशि नहीं मिलती, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे। उनके इस अनोखे आंदोलन से नगरपालिका प्रशासन के सामने सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। अब प्रशासन की ओर से शेष 16 लाख रुपए के भुगतान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
आंदोलन की दखल लेते हुए मुख्याधिकारी ने दिलीप झोरे से चर्चा की और दिवाली तक शेष राशि देने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद झोरे ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। हालांकि, झोरे का आरोप है कि बाद में प्रशासन अपने ही दिए आश्वासन से पीछे हट गया। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारी की लंबित 16 लाख रुपए की राशि का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब नगरपालिका प्रशासन वास्तव में यह राशि कब तक अदा करता है, इस पर झोरे के साथ ही नागरिकों की भी नजरें टिकी हैं।