Wardha Farmers: प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति इस वर्ष वर्धा जिले के किसानों का उत्साह कम दिखाई दे रहा है। खरीफ सीजन 2026-27 के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है, लेकिन 17 जुलाई तक जिले के केवल 13,425 किसानों ने ही योजना में पंजीयन कराया है।
इससे स्पष्ट है कि इस वर्ष बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा योजना से दूरी बनाए हुए हैं। जिले में लगभग 27 हजार 68 ऋणी एवं गैर-ऋणी किसान हैं, जबकि अब तक 29,856.02 हेक्टेयर क्षेत्र को फसल बीमा का संरक्षण मिला है। यह जिले के कुल लक्ष्य का केवल 2.44 प्रतिशत है। पिछले वर्ष खरीफ सीजन में 36,283 किसानों ने फसल बीमा योजना में भाग लिया था।
जिले में उत्पादन आधारित संशोधित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू है। खरीफ मौसम में ज्वार, तुअर, मूंग, सोयाबीन और कपास की फसलों के लिए किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी अरविंद उपरीकर ने जिले के किसानों से समय रहते प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल होकर प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
खरीफ सीजन के लिए विभिन्न फसलों का बीमा प्रीमियम एवं बीमि राशि निर्धारित की गई है। इसके अनुसार ज्वार 660 रुपये प्रति हेक्टेय प्रीमियम, 22,000 रुपये बीमा संरक्षण, मूंगफली 900 रुपये प्रि हेक्टेयर प्रीमियम, 45,000 रुपये बीमा संरक्षण, सोयाबीन 58 रुप प्रीमियम, 58,000 रुपये बीमा संरक्षण। तुअर (अरहर) 47 रुप प्रीमियम, 47,000 रुपये बीमा संरक्षण, कपास 65 रुपये प्रीमियम 65,000 रुपये बीमा संरक्षण।
कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष खरीफ और रबी दोनों मौसम में बड़ी संख्या में किसानों की फसले 33 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हुई थीं, लेकिन अनेक किसानों को अपेक्षित बीमा दावा नहीं मिला, इससे किसानों में नाराजगी बढ़ी और इस वर्ष योजना में उनकी भागीदारी कम होती दिखाई दे रही है। इधर, 1 और 2 जुलाई को हुई बारिश के बाद जिले में अब तक अच्छी वर्षां नहीं हुई है। लगातार 2 बारिश नहीं होने से फसलें सूखने की कगार पर है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे किसी तरह फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान चिंतित है।
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसके तहत खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1।5 प्रतिशत तथा नगदी एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसानों को देना होता है।
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यदि प्राकृतिक आपदा के कारण फसल को अचानक नुकसान होता है, तो किसान को 72 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी, बैंक, कृषि या राजस्व विभाग, टोल-फ्री नंबर अथवा फसल बीमा ऐप के माध्यम से इसकी सूचना देना अनिवार्य है। इसके आधार पर नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों के बैंक खातों में बीमा दावा राशि जमा की जाती है।