नीलेश राणे व सुनील प्रभु (सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

नीलेश राणे और सुनील प्रभु में हुई 'तू-तू-मैं-मैं', राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में मचा हंगामा

महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन हंगामे भरा रहा। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर बहस हुई। विपक्ष ने कई आरोप भी लगाए।

आकाश मसने

नागपुर : विधानसभा में उस समय सत्तापक्ष और विपक्ष में कड़ा संघर्ष देखा गया, जब राज्यपाल के अभिभाषण पर विरोधियों ने कड़ी टिप्पणी की। ठाकरे सेना के गुट नेता भास्कर जाधव ने राज्यपाल की 'मेरी सरकार' की भूमिका पर आपत्ति जताई और उनकी संवैधानिक और संवैधानिक स्थिति के उल्लंघन की आलोचना की। जैसे ही विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि राज्यपाल ने शपथ दिलाने से पहले संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई।

मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि की हार से विपक्ष में निराशा है। कटू आलोचना करते हुए कहा कि, बौद्धिक दिवालियापन न दिखाएं। अतुल भातखलकर और राज्य मंत्री आशीष जयसवाल उनकी मदद के लिए नियमों का हवाला दिया। इससे सदन में कुछ देर के लिए हंगामा मच गया।

कार्यवाही से हटाया जाएगा अंश

तालिका अध्यक्ष रमेश बोरनारे ने कहा कि नियमों के मुताबिक राज्यपाल के खिलाफ बयान को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। हालांकि, सत्ता पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि जाधव के बयान को कार्यवाही से हटा दिया जाए। आखिरकार तालिका अध्यक्ष ने राज्यपाल के बारे में दिए गए बयान को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।

बीजेपी के पराग अलवानी ने शुरू की चर्चा। इसके बाद चर्चा में भाग लेते हुए जाधव ने राज्यपाल की भूमिका पर नाराजगी जताई। इसने राज्यपाल के संगठनात्मक और वैधानिक अधिकार पर अतिक्रमण की ओर इशारा किया। राज्यपाल ने यह रुख अपनाया कि जब उन्होंने 'मेरी सरकार' कहा, तो उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति पर खेद व्यक्त करना था जो आठ महीने में ढह गई। शपथ ग्रहण का स्थान बदलने के लिए भी राज्यपाल को सूचित करना चाहिए था। उद्धव ठाकरे ने शिवतीर्थ में शपथ ली। फडनवीस ने वानखेड़े स्टेडियम पर शपथ ली थी।

राज्यपाल से अनुमति लेना अनिवार्य

भास्कर जाधव ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि जगह तय करने में राज्यपाल की इजाजत ली गई हो। राज्यपाल एक संवैधानिक पद है। घटना को कम आंकना। घटना के प्रति कोई सम्मान नहीं। इस घटना को छोड़ा नहीं जा सकता। यह कहते हुए कि विपक्ष घटनाओं के बारे में दुष्प्रचार कर रहा है, उन्होंने राज्यपाल से पूछा कि वह उन्हें बताएं कि उन्होंने सरकार बनाने के लिए कब नियुक्ति की है। आजाद मैदान में शपथ ग्रहण मंडप बनाया गया था। वह मंडप किसने तय किया? उन्होंने इस बात की भी आलोचना की कि राज्यपाल को हल्के में लिया गया। मंत्री विखे पाटिल ने जाधव के भाषण पर आपत्ति जताई और उम्मीद जताई कि सदन की रीति-नीति का पालन किया जाना चाहिए। भातखलकर, राज्य मंत्री जयसवाल ने नियमों का प्रावधान भी प्रस्तुत किया। इसके बाद नियम 34(4) के तहत राज्यपाल के संबंध में दिए गए बयान को हटा दिया गया।

नीलेश राणे और सुनील प्रभु में हुई बहस

चर्चा के दौरान शिंदे गुट के नीलेश राणे और ठाकरे गुट के सुनील प्रभु स्पीकर की तरफ देखने के मुद्दे पर भिड़ गए। राणे के बगल में बैठे तुकाराम काटे बोलने के लिए खड़े हुए। उस वक्त प्रभु ने आपत्ति जताई। राणे ने प्रभु से कहा, आगे देख कर चर्चा करें। प्रभु के यह कहते ही राणे फिर नाराज हो गए कि मैं आपकी तरफ नहीं देख रहा हूं। जैसे ही उसने दोहराया कि सामने देखो, प्रभु ने कहा कि वह पीछे से वार नहीं करता है। कुछ मिनटों तक ऐसा ही चलता रहा। फिर मामला शांत हो पाया।

प्रन्यास को बर्खास्त करें

भाजपा विधायक प्रवीण दटके ने चर्चा में भाग लेते हुए सरकार की योजनाओं की सराहना की। साथ ही, नागपुर के नागरिकों के लिए मनपा द्वारा शुरू की गई संपत्ति, कर और अन्य संदर्भों की अभय योजना को जारी रखने की भी मांग की। नागपुर में प्रन्यास को तत्काल भंग करने की मांग की। 2014 में फडनवीस सरकार के दौरान NIT को खत्म कर दिया गया था। लेकिन, 2019 में गठबंधन सरकार आने पर इसे फिर से पुनर्जीवित किया गया। मनपा और प्रन्यास जैसी दो संस्थाओं के कारण नागपुर की जनता को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सुझाव दिया गया कि मुंबई में एमएमआरडीए की तर्ज पर नागपुर में मनपा का अस्तित्व बरकरार रखते हुए NIT को खत्म कर एनएमआरडीए के तहत शहर के 25 किमी क्षेत्र में विकास कार्य किया जाए।

बैलेट से लेना पडेगा चुनाव

उद्धव ठाकरे गुट के विधायक सुनील प्रभु ने कहा कि वर्तमान में इवीएम को लेकर गांव-गांव में आंदोलन हो रहे हैं। जिससे भविष्य में निश्चित ही बैलेट से चुनाव कराने पडेंगे। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा देने के नाम पर सरकार श्रेय ले रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य में मराठी भाषा की स्कूलें बंद हो रही है। ऐसे में केवल भाषा को दर्जा देकर कोई उपयोग नहीं होगा। बल्की उसके विस्तार के लिए भी कार्य करने होंगे।

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