एकतरफा प्यार कब तक चलता? आनंद दुबे ने बताया उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने का कारण

Anand Dubey Resignation: शिवसेना (UBT) के आनंद दुबे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आंतरिक घुटन, हिंदुत्व के मुद्दों पर चुप्पी और वैचारिक मतभेद को उद्धव का साथ छोड़ने की मुख्य वजह बताया है।
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आनंद दुबे और उद्धव ठाकरे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Reason Of Anand Dubey Resignation UBT: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के प्रमुख हिंदीभाषी चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।

कई वर्षों तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उद्धव ठाकरे गुट का मुखर बचाव करने वाले आनंद दुबे ने मीडिया के सामने आकर अपने इस्तीफे की पूरी वजह बताई। उन्होंने भारी मन से फैसला लेते हुए कहा कि वे पिछले कई महीनों से पार्टी के भीतर घुटन और मानसिक पीड़ा महसूस कर रहे थे।

क्यों आहत हुए आनंद दुबे?

पार्टी छोड़ने की सबसे तात्कालिक और भावनात्मक वजह बताते हुए आनंद दुबे ने कहा कि वे पिछले कई सालों से पार्टी के लिए अपना तन, मन और धन समर्पित कर चुके थे और हर जिम्मेदारी निष्ठापूर्वक निभा रहे थे। हालांकि, हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उनके खिलाफ AI से निर्मित भ्रामक खबरें फैलाकर निष्कासन का भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई।

आनंद दुबे ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब यह झूठी खबर फैली, तो पार्टी नेतृत्व ने इसका कोई खंडन नहीं किया और उन्हें खुद ही मीडिया में जाकर सफाई देनी पड़ी। इस घटना से बेहद आहत होकर उन्होंने कहा- मुझे बहुत पीड़ा हुई। मैं ही जज हूं और मैं ही अपराधी... ऐसा कभी कहीं होता है क्या। एकतरफा प्यार ज्यादा दिन नहीं चलता, इससे अच्छा बेवफा हो जाओ। तो अफवाहों पर पूर्णविराम लगाते हुए मैं खुद ही निकल गया।

वैचारिक मतभेद और हिंदुत्व से दूरी बने मुख्य कारण

आनंद दुबे ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहे वैचारिक मतभेद और पार्टी के रुख में आए बदलाव का परिणाम था। उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने के 4 मुख्य कारण बताए।

हिंदुत्व और सनातन धर्म के सिद्धांतों पर खामोशी

आनंद दुबे ने कहा कि वे खुद को वीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के आदर्शों का अनुयायी मानते हैं। लेकिन महा विकास आघाड़ी (MVA) गठबंधन में शामिल सहयोगी दल जब वीर सावरकर को गालियां देते हैं, सनातन धर्म की तुलना डेंगू से करते हैं या भगवान राम और भगवान शंकर के बीच भेद करते हैं, तब पार्टी खामोश रहती है। दुबे ने कहा कि वे ऐसे माहौल में हिंदुत्व और सनातन धर्म की आवाज उठाने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहे थे।

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शरजील इमाम, उमर खालिद और ध्रुव राठी मेरे हीरो नहीं

पार्टी की नई कार्यशैली और सहयोगियों पर तीखा हमला बोलते हुए आनंद दुबे ने कहा कि पार्टी में जो कीड़े-मकोड़े जैसे कॉकरोच, छिपकली, मक्खी और मच्छर घुस आए हैं, वे उनके नेता नहीं हो सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नेता शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हैं, बल्कि उनके नेता भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और कैप्टन स्मित मच्छार हैं।

उन्होंने नाराजगी जताई कि पूरे देश को बजरंगबली की शक्ति का संदेश देने वाले और सैकड़ों यहूदियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार के समर्थन में पार्टी ने एक ट्वीट तक नहीं किया, जिसने उनका दिल दुखा दिया।

चुनाव आयोग, SIR और CJP के विरोध प्रदर्शन से असहमति

आनंद दुबे ने शिवसेना (UBT) द्वारा चुनाव आयोग, SIR और CJP के आंदोलनों का समर्थन करने के कदम से पूरी तरह असहमति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह दावा गलत है कि देश में वोट चोरी हो रहे हैं, क्योंकि वास्तव में वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि कुछ लोगों की सोच चोरी हो गई है।

राष्ट्र सबसे पहले देश, पार्टी बाद में

पहलगाम आतंकी हमले के समय का जिक्र करते हुए दुबे ने बताया कि 22 अप्रैल के हमले के बाद वे 26 अप्रैल को गोलियों के माहौल के बीच अपने साथी व विधिमंडल विंग के उप आयोजक गुलाबचंद मौर्य के साथ वहां गए थे और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा व फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि संकट के समय पार्टी के वरिष्ठ सांसदों और विधायकों को वहां जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राजनीति कीजिए, सरकार का विरोध कीजिए, लेकिन देश के खिलाफ काम मत कीजिए, क्योंकि उनके लिए राष्ट्र सबसे पहले है।

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भविष्य की राजनीति पर रुख

आनंद दुबे ने साफ किया कि वे मरते दम तक स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की मूल हिंदुत्व विचारधारा पर ही कायम रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे देश, हिंदुत्व और सनातन धर्म के खिलाफ जाने से बेहतर मरना पसंद करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें उचित मंच मिलेगा, तब वे अपने अगले राजनीतिक कदम का फैसला करेंगे।

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