चौथा साप्ताहिक टेंडर 4 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।
तीसरे टेंडर में 1,02,200 टन के मुकाबले 99,146 टन गेहूं बिका था।
चौथे टेंडर में गेहूं की पेशकश 96,800 टन बढ़ाई गई है।
पंजाब का कोटा 25,000 से बढ़ाकर 44,000 टन किया गया।
Wheat Supply Increased In India: त्योहारी मांग और खुले बाजार में गेहूं की मजबूत कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने महंगाई पर अंकुश लगाने और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत चौथे साप्ताहिक टेंडर में गेहूं की पेशकश लगभग दोगुनी कर दी है।
तीसरे टेंडर में जहां 1,02,200 टन गेहूं बिक्री के लिए रखा गया था, वहीं 4 नवंबर को होने वाले चौथे टेंडर में यह मात्रा बढ़ाकर 1,99,000 टन प्रस्तावित की गई है। यानी एक ही टेंडर में करीब 96,800 टन की बढ़ोतरी की गई है।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर के अनुसार, सरकार का यह कदम गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और फ्लोर मिलों को पर्याप्त सरकारी आपूर्ति उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
तीसरे टेंडर में 1,02,200 टन के मुकाबले 99,146 टन गेहूं की बिक्री हुई थी। करीब 97 फीसदी उठाव इस बात का संकेत है कि फ्लोर मिलों और प्रोसेसर्स की सरकारी गेहूं में मांग मजबूत बनी हुई है। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने चौथे टेंडर में आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है।
राज्यवार आवंटन में पंजाब को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। यहां कोटा 25,000 से बढ़ाकर 44,000 टन कर दिया गया है। हरियाणा में 13,000 से 23,000 टन, दिल्ली में 5,000 से 12,000 टन और उत्तर प्रदेश में 8,000 से 14,000 टन किया गया है।
कर्नाटक और असम का कोटा भी 5,000 से बढ़ाकर 12,000 टन कर दिया गया है। मध्य प्रदेश में 6,000 से 10,000 टन तथा महाराष्ट्र राज्य में 2,100 से बढ़ाकर 5,000 टन गेहूं उपलब्ध कराया जाएगा।
बाजार जानकारों के अनुसार, सरकारी गेहूं की बढ़ी उपलब्धता से फ्लोर मिलों की खुले बाजार पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे निजी बाजार में खरीद का दबाव घटने और कीमतों की तेजी पर ब्रेक लगने की संभावना है।
हालांकि, केवल सप्लाई बढ़ने से गेहूं की कीमतों में बड़ी गिरावट तय नहीं है। सुरेश भाई ठक्कर का मानना है कि चौथे टेंडर में बिक्री प्रतिशत और बोली के भाव बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
यदि लगभग दोगुनी मात्रा के बावजूद 90-95 फीसदी या उससे अधिक गेहूं बिकता है और भाव ऊंचे बने रहते हैं, तो यह मजबूत मांग का संकेत होगा। फिलहाल बाजार की नजर 4 नवंबर के टेंडर पर टिकी है। सरकारी सप्लाई बढ़ने से महंगाई को राहत मिलने की उम्मीद जरूर है।