Ambarnath river crisis (सोर्सः सोशल मीडिया) 
ठाणे

हर हफ्ते रंग बदलती है वालधुनी नदी, नदी को नाला बनाने के लिए केमिकल कंपनियां जिम्मेदार

Waladhuni River Pollution: उल्हासनगर और अंबरनाथ क्षेत्र में बहने वाली वालधुनी नदी में औद्योगिक कचरे और सीवेज के कारण बढ़ते प्रदूषण से नदी का रंग हर हफ्ते बदल रहा है।

आंचल लोखंडे

Ulhasnagar Environment News: अंबरनाथ और उल्हासनगर रेलवे स्टेशन की पटरियों के पास से होकर बहने वाली वालधुनी नदी, उल्हासनगर रेलवे स्टेशन के समीप से गुजरती है। यहां प्रतिदिन हजारों किलो कचरा इस नदी में मिल रहा है। नदी का पानी काला हो चुका है और इसमें सीवेज मिलाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। नदी के किनारे कई छोटे-बड़े कारखाने हैं, जहां से कचरा और कच्चा माल सीधे नदी में डाला जा रहा है।

यह कचरा कई जगहों पर जमा हुआ भी दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वालधुनी नदी को उसका पुराना स्वरूप और वैभव कभी वापस मिल पाएगा। प्रदूषण के कारण नाले में तब्दील हो चुकी वालधुनी नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास अब तक कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। कई वर्षों से यह नदी बदहाली की स्थिति में है।

कई छोटी-छोटी नालियों का गंदा पानी इसमें मिलना शुरू

अंबरनाथ पर्वतमाला से निकलने वाली यह नदी अंबरनाथ नगर के प्रवेश द्वार से उल्हासनगर शहर में प्रवेश करती है। यह नदी शिलाहार कालीन शिव मंदिर के पास से बहती है, जहां इसका प्राकृतिक स्वरूप कुछ हद तक दिखाई देता है। मंदिर से कुछ दूरी पर कई छोटी-छोटी नालियों का गंदा पानी इसमें मिलना शुरू हो जाता है और आगे बढ़ने पर इन नालियों की संख्या और गंदे पानी की मात्रा दोनों बढ़ती जाती हैं।

कारखानों से निकलने वाला कचरा और अन्य अपशिष्ट सीधे नदी में डाला जा रहा है

इसके अलावा कई छोटे-बड़े उद्योगों से निकलने वाला अनुपचारित अपशिष्ट भी सीधे नदी में मिल जाता है। इस कारण जो नदी शुरुआत में एक छोटे जलस्रोत की तरह दिखती है, वह आगे चलकर अत्यधिक प्रदूषित जलधारा में बदल जाती है। उल्हासनगर स्टेशन के पास इस नदी का विशाल रूप देखा जा सकता है।

यहां नदी का रंग हर हफ्ते बदलता रहता है। कभी लाल, कभी काला, तो कभी पीला या नीला दिखाई देता है। फिलहाल इसका रंग गहरा काला हो गया है। यह भी देखा गया है कि नदी किनारे स्थित कई औद्योगिक कंपनियां बचे हुए कच्चे माल और कचरे को सीधे नदी में फेंक रही हैं। इस कचरे को किनारे इस तरह रखा जाता है कि कुछ दिनों में वह धीरे-धीरे नदी में बह जाए या तल में समा जाए, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है।

वालधुनी नदी के पुनरुद्धार के लिए कई बार घोषणाएं की गई

वर्तमान में वालधुनी नदी के पास, उल्हासनगर स्टेशन क्षेत्र में कल्याण से बदलापुर तक तीसरी और चौथी रेलवे लाइन का काम चल रहा है। नदी के किनारे भारी मात्रा में कूड़ा जमा और बहता हुआ दिखाई दे रहा है। पर्यावरणविदों की मांग है कि इस कचरे को नदी में जाने से रोका जाए, लेकिन आरोप है कि उनकी बातों को अनसुना किया जा रहा है।

वालधुनी नदी के पुनरुद्धार के लिए कई बार घोषणाएं की गई हैं, लेकिन उन पर क्या प्रगति हुई, यह अब भी स्पष्ट नहीं है। कुछ दिन पहले अंबरनाथ की नगर परिषद अध्यक्ष तेजश्री करंजुले ने शिव मंदिर क्षेत्र का निरीक्षण कर वहां चल रहे कार्यों की समीक्षा की, हालांकि उल्हासनगर नगर प्रशासन ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

प्रतिक्रिया:

वालधुनी जल बिरादरी के पर्यावरणविद शशिकांत दयामा ने कहा कि वालधुनी नदी में लगातार कूड़ा और मलबा मिलाया जा रहा है। अंबरनाथ और उल्हासनगर दोनों शहरों के नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस नदी के लिए एक सुनियोजित योजना बनाकर इसका पुनरुद्धार करना चाहिए।

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