Ulhasnagar Municipal Corporation Nominated Corporators Dispute: उल्हासनगर मनपा के सात स्वीकृत नगरसेक पद के उम्मीदवारों को चुनने के लिए हुई विशेष महासभा शुरू से ही विवादों में रही। सस्पेंडेड BJP कॉरपोरेटर प्रधान पाटिल की मौजूदगी की वजह से महासभा में काफी हंगामा हुआ।
फिर जनरल मीटिंग खत्म होने से कुछ देर पहले स्वीकृत नगरसेवक उम्मीदवारों के नामों में बदलाव की वजह से राजनीतिक माहौल और भी गरमा गया। आखिर में, BJP के दो स्वीकृत नगरसेवक उम्मीदवारों और शिवसेना उल्हासनगर शहर विकास आघाड़ी के पांच स्वीकृप्त नगरसेवक उम्मीदवारों को स्वीकृत नगरसेवक चुने जाने की घोषणा की गई।
16 सितंबर को हुई जनरल मीटिंग में मेयर अश्विनी कमलेश निकम के खिलाफ कथित तौर पर गाली-गलौज करने के आरोप में प्रधान पाटिल को अगली तीन जनरल मीटिंग के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन गुरुवार को स्पेशल जनरल मीटिंग में उनके शामिल होने पर एक नया विवाद खड़ा हो गया। मेयर ने फैसला लिया कि अगर प्रधान पाटिल हॉल में होंगे तो स्वीकृत नगरसेवकों को चुनने का प्रोसेस शुरू नहीं किया जाएगा।
इसके बाद मेयर ने सिक्योरिटी गार्ड्स को बुलाया और प्रधान पाटिल को हॉल से बाहर निकालने का आदेश दिया। इस वजह से महासभा की कार्रवाई कुछ देर के लिए रुकी रही। आखिर में स्पेशल जनरल असेंबली की गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रधान पाटिल खुद हॉल से चले गए और उसके बाद चुनाव प्रोसेस शुरू किया गया।
उल्हासनगर महानगरपालिका में स्वीकृत नगरसेवक पदों को लेकर एक बार फिर शिवसेना और भाजपा के बीच विवाद सामने आया है।
महापौर अश्विनी निकम के फैसले के बाद भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
जानकारी के अनुसार, संख्याबल के आधार पर चुने जाने वाले चार स्वीकृत नगरसेवक पदों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए जाने थे। विशेष महासभा के दौरान दो उम्मीदवारों को अपात्र घोषित किए जाने के बाद महापौर अश्विनी निकम ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए शिवसेना के पांच और भाजपा के दो उम्मीदवारों के नाम स्वीकृत नगरसेवक पद के लिए घोषित कर दिए।
इस दौरान महानगर पालिका में 76 नगरसेवकों की संख्या के हिसाब से स्वीकृत नगरसेवकों को चुनने का प्रोसेस तय किया गया। इसमें BJP के 37, शिवसेना उल्हासनगर शहर विकास आघाड़ी के 36, वंचित बहुजन आघाड़ी के 2 और कांग्रेस का 1 नगरसेवक था।
लेकिन चुनने के प्रोसेस के दौरान अप्रूव्ड नगरसेवकों के नामों को लेकर विवाद भी हुआ। महानगर पालिका की तरफ से पहले जारी लिस्ट में BJP से डॉ. एस. बी. सिंह और एडवोकेट पूनम गुप्ता के नाम थे।
लेकिन, विशेष महासभा समाप्त होने से कुछ मिनट पहले ये नाम बदल दिए गए और महापौर द्वारा आशा पवार और हेमा पिंजानी के नाम घोषित कर दिए गए। BJP ने इस अचानक बदलाव पर कड़ा एतराज़ जताया। कोई शिवसेना और भाजपा पर मनमानी और गैर कानूनी कार्य के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करने का आरोप लगा और अदालत का दरबाजा खटखटाने की घोषणा की।
जबकि शिवसेना और महापौर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार विशेष महासभा में स्वीकृत नगरसेवकों का चुनाव करने की बात कही। महासभा समाप्त होने के बाद शिवसेना और भाजपा के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं द्वारा खूब नारेबाजी की गई।
उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के बाद महापौर अश्विनी निकम ने विशेष महासभा के समापन की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद भाजपा की ओर से आपत्ति जताई गई। भाजपा नेताओं का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया और संख्याबल के आधार पर स्वीकृत नगरसेवकों के चयन को लेकर नियमों का पालन किया जाना चाहिए था।
महापौर के फैसले के बाद भाजपा में नाराजगी देखने को मिली। भाजपा के जिला अध्यक्ष एवं गुटनेता राजेश ब्लड रिया ने शिवसेना और महापौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने की घोषणा की।
राजेश ब्लड रिया ने कहा कि पार्टी इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। भाजपा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर न्यायालय में अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। अब मामला अदालत तक पहुंचने के बाद स्वीकृत उल्हासनगर महानगरपालिका के नगरसेवक पदों के चयन और महापौर के फैसले को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।