

Pune Infrastructure Vs Basic Needs: नदी सुधार परियोजना, फ्लाईओवर, रिंग रोड और मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्टों की चर्चा के बीच पुणे के आम नागरिकों की बुनियादी समस्याएं पीछे नहीं छूटनी चाहिए। शहर में आज भी पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, ड्रेनेज और यातायात जैसी समस्याएं मौजूद हैं। ऐसे में विकास का पहला पैमाना बड़े प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। यह स्पष्ट भूमिका राष्ट्रवादी कांग्रेस के नगरसेवक अमोल बालवडकर ने रखी।
नवभारत, नवराष्ट्र के दफ्तर में विशेष संवाद के दौरान बालवडकर ने मनपा की कार्यप्रणाली, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ सड़क सुरक्षा और पानी के सवाल पर सत्ताधारियों को घेरा। उन्होंने कहा कि बड़े प्रोजेक्ट वरिष्ठ नेता पूरा करेंगे, लेकिन सामान्य पुणेकर की रोजमर्रा की समस्या हल करना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहली जिम्मेदारी है।
मनपा स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए बालवडकर ने कहा कि स्कूल की इमारत पर रंग चढ़ा देना और कक्षा में डिजिटल बोर्ड लगा देना शिक्षा व्यवस्था को ‘स्मार्ट’ नहीं बनाता। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए शिक्षक, प्रशिक्षित स्टाफ, अंग्रेजी माध्यम की प्रभावी व्यवस्था और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा स्कूलों को विभिन्न संस्थाओं को संचालन के लिए सौंपने की प्रक्रिया शिक्षा के निजीकरण की ओर बढ़ रही है। कुछ स्कूलों की इमारतें गिराकर पत्रे के शेड में कक्षाएं चलाए जाने का दावा करते हुए उन्होंने पूछा कि इसे आखिर किस तरह की ‘स्मार्ट शिक्षा’ कहा जा सकता है? निजी स्कूलों की फीस का मुद्दा उठाते हुए बालवडकर ने कहा कि पहली कक्षा में प्रवेश के लिए कई जगह एक से डेढ़ लाख रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है। सामान्य परिवारों के लिए शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है।
आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया पर भी बालवडकर ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लोकेशन और दस्तावेजों में खामियां बताकर अभिभावकों से पैसे मांगे जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
उनका कहना है कि आरटीई के तहत आठवीं तक शिक्षा का लाभ मिलने के बाद नौवीं और दसवीं में फीस का बोझ गरीब परिवारों के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है। आर्थिक परेशानी के कारण बच्चों, विशेषकर बेटियों की शिक्षा बीच में छूटने की स्थिति पैदा हो रही है, ऐसा उन्होंने कहा।
सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर बालवडकर ने मनपा की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़क के गड्ढे, खुले मैनहोल, ड्रेनेज की खामियां, बिजली के खंभे और पेड़ों की सूखी शाखाएं नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। दुर्घटना होने के बाद मुआवजे और बीमा के लिए पीड़ितों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
खड़की की एक दुर्घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कार का दरवाजा अचानक खुलने से साइकिल सवार गिरा और पीछे से आ रही पीएमपीएमएल बस का पहिया उसके हाथ पर से गुजर गया। उपचार के लिए करीब 12 लाख रुपये का खर्च बताया गया और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अंततः उसका हाथ काटना पड़ा, ऐसा उन्होंने कहा। बालवडकर ने दुर्घटना में घायल व्यक्ति को पांच लाख रुपये और मृतक के परिवार को दस लाख रुपये की सहायता देने की मांग की। पीएमपीएमएल अथवा मनपा के वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं में बीमा दावे के लिए स्वतंत्र नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी उन्होंने रखने की जानकारी दी।
पुणे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निशाना साधते हुए बालवडकर ने कहा कि सार्वजनिक अस्पतालों पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए निजी अस्पतालों में प्रसूति का खर्च बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि सामान्य प्रसूति के लिए 60 से 70 हजार रुपये और सिजेरियन के लिए एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो सकता है। नवजात बच्चों के लिए एनआईसीयू सुविधाओं की कमी भी उन्होंने उठाई और मनपा अस्पतालों में इन सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की।
बाणेर-बालेवाड़ी, पाषाण, सुतारवाडी और सोमेश्वरवाड़ी क्षेत्र के पानी के सवाल को अपने राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए बालवडकर ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद पानी की समस्या का समाधान होने तक नए निर्माणों को अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए।
2017 में चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में आठ जलकुंभ और करीब 150 किलोमीटर जलवाहिनी का काम हुआ तथा 95 प्रतिशत से अधिक पानी की समस्या दूर हुई, ऐसा उन्होंने दावा किया।
बालवडकर ने कहा कि रिंग रोड, एचसीएमटीआर, नदी सुधार परियोजना और मेट्रो जैसे बड़े प्रोजेक्ट अपनी जगह जरूरी हैं, लेकिन इनकी चमक में शहर की बुनियादी समस्याएं दबनी नहीं चाहिए।
पुणे को ऐसी विकास नीति की जरूरत है, जिसमें बड़े प्रोजेक्टों के साथ पानी की नियमित आपूर्ति, बेहतर सरकारी स्कूल, सुलभ स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षित सड़कें और प्रभावी ड्रेनेज को प्राथमिकता मिले। “बड़े प्रोजेक्ट नेता करेंगे, लेकिन आम पुणेकर के रोजमर्रा के सवाल कौन हल करेगा?” यह सवाल उठाते हुए बालवडकर ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।