Jafri River Railway Debris Issue Mira Bhayandar  
ठाणे

रेलवे की जिद बनेगा मीरा-भाईंदर की मुसीबत, जाफरी नदी का मलबा मानसून में डूब सकता है शहर

Jafri River Railway Debris Issue Mira Bhayandar: मीरा-भाईंदर में 5वीं-6वीं रेलवे लाइन के मलबे से जाफरी नदी अवरुद्ध। रेलवे ने मिट्टी हटाने से किया इनकार, मानसून में भारी जलभराव का खतरा।

अनिल सिंह

Mira Bhayandar Monsoon Water Logging: मुंबई से सटे मीरा-भाईंदर के लिए आगामी मानसून एक बड़ी मुसीबत का संकेत दे रहा है। बोरीवली से दहानू के बीच बिछाई जा रही पांचवीं और छठी रेलवे लाइन का निर्माण कार्य अब स्थानीय निवासियों के लिए जलभराव (Waterlogging) का मुख्य कारण बनता जा रहा है। रेलवे प्रशासन द्वारा निर्माण के दौरान जाफरी नदी और अन्य नालों के प्राकृतिक प्रवाह को मिट्टी डालकर अवरुद्ध करने और अब उस मलबे को हटाने से इनकार करने के कारण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच ठन गई है।

दहिसर और मीरा रोड के बीच चल रहे इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत रेलवे ट्रैक के पास भारी मात्रा में मिट्टी भराई की गई है। जाफरी नदी, जो मीरा रोड क्षेत्र की जल निकासी के लिए जीवनरेखा मानी जाती है, वहां पानी के बहाव के लिए केवल कुछ छोटे पाइप डाले गए हैं, जो भारी बारिश के दौरान पानी के दबाव को झेलने में पूरी तरह अक्षम साबित हो सकते हैं।

रेलवे की हठधर्मिता और फंड का विवाद

इस गंभीर मुद्दे पर मीरा-भाईंदर की महापौर डिंपल मेहता ने रेलवे अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की। बैठक के दौरान रेलवे प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि मिट्टी हटाने का काम तभी होगा जब मीरा-भाईंदर नगर निगम (MBMC) इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराएगा। रेलवे के इस अड़ियल रुख पर महापौर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब निर्माण रेलवे का है और मलबा उन्होंने डाला है, तो उसे हटाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए। जलभराव की स्थिति में हजारों नागरिकों का जीवन संकट में पड़ सकता है।

जनप्रतिनिधियों की चेतावनी और अस्थायी उपाय

उप महापौर ध्रुवकिशोर पाटिल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मानसून से पहले जाफरी नदी के तल से मिट्टी नहीं हटाई गई, तो शहर के निचले हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। फिलहाल, रेलवे ने सुरक्षा के नाम पर मिट्टी के ढेरों के किनारे सीमेंट की दीवार बनाने का निर्देश दिया है ताकि मिट्टी पटरियों पर न आए, लेकिन यह जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की यह खींचतान मानसून में उनकी जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।

23 मार्च को निर्णायक स्थल निरीक्षण

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब 23 मार्च 2026 को रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों और मनपा प्रशासन की मौजूदगी में विवादित स्थल का संयुक्त निरीक्षण (Site Inspection) किया जाएगा। इस निरीक्षण के दौरान जाफरी नदी के जल प्रवाह की क्षमता और रेलवे द्वारा डाले गए अवरोधों का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि क्या रेलवे प्रशासन अपनी जिद छोड़कर जनहित में कदम उठाता है या मीरा-भाईंदर को एक बार फिर भारी बारिश में डूबने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

मीरा-भाईंदर से नवभारत के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट

राजस्थान के लाल का जापान में डंका! IIT से PhD के बाद टोक्यो में असिस्टेंट प्रोफेसर बने जतिन नामा

UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्काल रोक से इनकार, केंद्र-NPCI को नोटिस

Bhagat Singh: मैं नास्तिक क्यों हूं, भगत सिंह ने जेल में लिखा लेख, जो आज भी युवाओं को करता हैं प्रेरित

चुनाव आयोग पर आरोप के बीच CWC की बैठक, मल्लिकार्जुन खरगे का CEC पर बीजेपी की विचारधारा को बढ़ाने का आरोप

बृजभूषण सिंह की बढ़ीं मुश्किलें! बरी किए जाने के खिलाफ कोर्ट पहुंचीं महिला पहलवान, 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई