मनपा ने 21 अगस्त 2024 को पेड़ों पर लाइट और विज्ञापन लगाने पर प्रतिबंध लगाया था।
नियम तोड़ने पर दो कानूनों के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
वर्ष 2025 में काशीमीरा के एक होटल संचालक पर मामला दर्ज हुआ था।
फॉर फ्यूचर इंडिया के अध्यक्ष हर्षद ढगे ने आपत्ति जताई है।
Tree Decoration Near Commissioner Bungalow: पेड़ों पर कीलें ठोकने, विज्ञापन लगाने और बिजली की लड़ियां बांधने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देने वाला मीरा-भाईंदर महानगरपालिका प्रशासन अब खुद सवालों के घेरे में है। दिवाली के अवसर पर मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा के सरकारी बंगले के आसपास पेड़ों पर बड़ी संख्या में बिजली की लड़ियां लगाए जाने का मामला सामने आया है।
इससे मनपा के नियमों की निष्पक्षता और प्रशासन के दोहरे मापदंड पर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरणप्रेमी हर्षद ढगे ने पेड़ों से बिजली की लड़ियां तत्काल हटाने, पेड़ों को हुए नुकसान का निरीक्षण कर पंचनामा बनाने तथा सजावट की अनुमति, सरकारी खर्च और संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार की भूमिका की जांच करने की मांग की है।
बता दें कि मीरा-भाईंदर मनपा के उद्यान विभाग ने 21 अगस्त 2024 को सार्वजनिक सूचना जारी कर पेड़ों पर कीलें ठोकने, पोस्टर, विज्ञापन और बिजली की लाइटें लगाने पर प्रतिबंध लगाया था। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम, 1975 और संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1995 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में काशीमीरा स्थित एक होटल के बाहर पेड़ पर सजावटी लाइटें लगाने के मामले में होटल मालिक के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया गया था। ऐसे में अब आयुक्त के सरकारी बंगले के आसपास पेड़ों पर हुई सजावट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ठाणे जिले के फॉर फ्यूचर इंडिया के अध्यक्ष हर्षद ढगे का कहना है कि जब आम नागरिकों और होटल संचालकों के खिलाफ पेड़ों पर सजावटी लाइटें लगाने के लिए पुलिस कार्रवाई की जाती है, तो आयुक्त के सरकारी बंगले के मामले में वही नियम क्यों लागू नहीं होते? लाइटें लगाने की अनुमति किसने दी और इसका खर्च किस निधि से किया गया?
कानून सबके लिए समान होना चाहिए। प्रशासन पहले अपने ही परिसर में नियमों का पालन सुनिश्चित करे और उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करे।