Mira Bhayandar (सोर्सः सोशल मीडिया) 
ठाणे

Mira Bhayandar के मनपा स्कूलों में लैब का अभाव, बिना प्रयोग के पढ़ रहे छात्र

Mira Bhayandar Municipal Corporation Schools में विज्ञान शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। ज्यादातर स्कूलों में प्रयोगशाला की कमी के कारण छात्र बिना प्रायोगिक ज्ञान के पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

अपूर्वा नायक

Mira Bhayandar Municipal Schools Science Lab Shortage: मीरा भाईंदर मनपा द्वारा संचालित विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावों के बीच यह गंभीर मुद्दा सामने आया है कि अधिकांश स्कूलों में सामान्य विज्ञान विषय के लिए आवश्यक प्रयोगशालाएं और उपकरण उपलब्ध ही नहीं हैं। विद्यार्थियों को प्रयोगशाला के बिना ही विज्ञान की शिक्षा दी जा रही है।

मीरा-भाईंदर मनपा द्वारा मराठी, हिंदी, गुजराती, उर्दू, अंग्रेजी माध्यम के 36 स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। जिसमें करीब 9 हजार से अधिक गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय छात्र पढ़ते हैं। इन छात्रों के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी मनपा पर होती है। मनपा शिक्षा के लिए बड़ी धनराशि खर्च करती है और नागरिकों से शिक्षा कर भी वसूलती है।

इसके बावजूद, कक्षा 1 से 10वीं तक पढ़ने वाले छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है। खासकर कक्षा 5वीं से 10वीं तक के छात्रों के लिए सामान्य विज्ञान एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें प्रयोग और प्रदर्शन के माध्यम से सीखना अनिवार्य माना जाता है।

विद्यालयों में न तो आवश्यक उपकरण न ही प्रयोगशाला

पाठ्‌यपुस्तकों के अनुसार प्रत्येक अध्याय के साथ प्रयोग और प्रदर्शन जरूरी है, लेकिन जमीनी स्तर पर ये गतिविधियां नहीं हो रही हैं। मनपा विद्यालयों में न तो आवश्यक उपकरण है और न ही प्रयोगशालाओं की व्यवस्था, इससे छात्रों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित नहीं हो पा रहा है।

जिन स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध है, वहां प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएं, जहां जगह की कमी है, वहां कम से कम प्रयोग सामग्री रखने के लिए विशेष बॉक्स उपलब्ध कराया जाए। कक्षा 5वीं से 9वीं तक के लिए आवश्यक प्रयोग सामग्री की सूची के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ऐसी मांग मैंने मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा से की है।

- आभा ओ। पाटिल, नगरसेविका

भविष्य पर पड़ रहा असर

बिना प्रायोगिक ज्ञान के छात्र आगे चलकर कॉलेज स्तर पर पिछड़ सकते हैं। विज्ञान जैसे विषय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रयोगात्मक समझ भी उतनी ही जरूरी होती है। यह भी सामने आया है कि यह जांचने के लिए कोई अधिकारी नियुक्त नहीं है कि स्कूलों में वास्तव में प्रयोग कराए जा रहे है या नहीं। केवल समय सारिणी देखकर इसकी पुष्टि की जा सकती है, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। इस संदर्भ में प्रतिक्रिया के लिए शिक्षण विभाग की उपायुक्त कविता बोरकर से पूछने पर उन्होंने कहा कि जानकारी लेकर बताएंगे वहीं शिक्षण अधिकारी प्रसाद शिंगटे से संपर्क करना चाहा, तो वे उपलब्ध नहीं हुए।

मीरा भाईंदर से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट

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