100 साल पुराने KEM Hospital का नाम बदलने पर बवाल, नेताओं ने उठाए सवाल

मुंबई के KEM Hospital का नाम बदलने के प्रस्ताव पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। ठाकरे गुट ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ बताते हुए विरोध जताया और फैसले को वापस लेने की मांग की।
KEM Hospital MRI Service Restoration News
केईएम अस्पताल (सौ. सोशल मीडिया )
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KEM Hospital Name Change Row: परेल स्थित बीएमसी के प्रसिद्ध केईएम अस्पताल का नाम बदलने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिवसेना (ठाकरे गुट) के नेता इसके खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास बदलने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बीएमसी में नेता प्रतिपक्ष किशोरी पेडणेकर ने कहा कि देश में तानाशाही जैसी स्थिति बन गई है। मुंबई के हितों की अनदेखी की जा रही है। एडवर्ड के योगदान से यह अस्पताल बना था। अब नाम बदलने की मांग करने वालों के पूर्वज उस समय कहां थे।

पैसे के दम पर इतिहास बदलने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सोमवार को किशोरी पेडणेकर स्थानीय विधायक अजय चौधरी और कई नगरसेवकों एक जनप्रतिनिधि मंडल ने केईएम अस्पताल की डीन डॉ संगीता रावत से मुलाकात की और नाम बदलने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा।

जल्दबाजी और बिना उचित प्रक्रिया के लिया गया निर्णय

केईएम अस्पताल का 100 साल से अधिक पुराना इतिहास है और हाल ही में इसका शताब्दी वर्ष बड़े उत्साह के साथ मनाया गया था। इस समारोह में देश-विदेश के नामी डॉक्टर, पूर्व डीन और कई गणमान्य शामिल हुए थे। ऐसे ऐतिहासिक विरासत वाले अस्पताल का नाम अचानक बदलने के प्रस्ताव पर नाराजगी जताई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार अस्पताल का नाम कौशल्या श्रेष्ठ एकलव्य स्मारक अस्पताल रखने का विचार है।

आरोप है कि यह निर्णय जल्दबाजी में और बिना उचित प्रक्रिया के लिया गया है। वर्ष 1926 में एक परोपकारी व्यक्ति के योगदान से इस अस्पताल की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।

नाम बदलने के पीछे स्वार्थ : अजय चौधरी

  • ठाकरे गुट के विधायक अजय चौधरी ने आरोप लगाया कि अस्पताल के नाम बदलने के पीछे कुछ लोगों का स्वार्थ छिपा है और मुंबई को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की जा रही है।
  • दबाव और दादागिरी के जरिए ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। यदि हिम्मत है, तो जिन्होंने टॉवर बनाए हैं, उनमें से एक टॉवर धर्मार्थ अस्पताल के लिए दें और उसका नाम जो चाहें रखें।

मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देने की मांग

  • प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अस्पताल का नाम बदलने के बजाय यहां की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
  • अस्पताल में नर्सों की कमी, एमआरआई, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी जैसी सेवाओं में दिक्कतें और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों पर भी सवाल उठाए गए, जल्द ही यह प्रतिनिधिमंडल महानगरपालिका आयुक्त से मुलाकात कर सैकड़ों नागरिकों के हस्ताक्षर वाला ज्ञापन सौपेगा।
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