Narendra Mehta MNS Controversy: महाराष्ट्र के भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीरा-भायंदर क्षेत्र को जैन नगरी बताए जाने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
कार्यक्रम में नरेंद्र मेहता ने कहा कि वह ऐसे शहर से आते हैं, जिसे अक्सर मिनी राजस्थान या जैन नगरी कहा जाता है। उन्होंने दावा किया कि मीरा-भायंदर में 33 से अधिक जैन मंदिर हैं और यहां बड़ी संख्या में संत-मुनियों का आना-जाना होता है।
मेहता ने कहा, गुरुदेव का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है। पिछला चुनाव बेहद कठिन था, लेकिन उनका आशीर्वाद मुझे प्रेरणा देता है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मेरा जन्म जैन परिवार में हुआ। मीरा-भायंदर में जब भी जैन समुदाय से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, हम मजबूती से उनके साथ खड़े रहते हैं।
उन्होंने अपने स्कूल से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। मेहता ने बताया कि जैन पर्व पर्युषण के दौरान उनके स्कूल में बच्चों के लंच बॉक्स में कंद-मूल सब्जियां नहीं लाने का नियम लागू किया गया था। इसे लेकर विवाद हुआ, लेकिन उन्होंने कहा कि स्कूल ने अपने निर्णय से पीछे हटने से इनकार किया और अपनी मान्यताओं पर कायम रहा।
मेहता ने जैन मुनियों के नंगे पैर चलने के दौरान उनके पैरों को गर्मी से बचाने के लिए सड़कों पर सफेद पट्टियां बनाए जाने के पुराने विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भी विरोध हुआ था, लेकिन वह अपने रुख पर कायम रहे।
मेहता के बयान पर एमएनएस की मीरा-भायंदर विधानसभा इकाई के अध्यक्ष सचिन पोपले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मेहता को विभाजनकारी राजनीति बंद करनी चाहिए। पोपले ने कहा कि मीरा-भायंदर को केवल किसी एक समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है और उन्होंने क्षेत्र को कोली, आगरी तथा मराठी लोगों की भूमि बताया।
पोपले ने स्कूल में कंद-मूल पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भी मेहता पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि एमएनएस के विरोध के बाद स्कूल को अपना निर्देश वापस लेना पड़ा था। उन्होंने जैन मुनियों के लिए सड़कों पर बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर हुए विरोध का भी जिक्र किया। एमएनएस नेता ने मेहता पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये आरोप एमएनएस की ओर से लगाए गए हैं।
नरेंद्र मेहता इससे पहले भी कई विवादों में रह चुके हैं। सितंबर में सेवन-इलेवन ग्रुप द्वारा संचालित सेवन स्क्वायर एकेडमी में पर्युषण के दौरान छात्रों के टिफिन में प्याज, लहसुन, चुकंदर और आलू जैसी कंद-मूल सब्जियां नहीं लाने के निर्देश को लेकर विवाद हुआ था। राजनीतिक विरोध और अभिभावकों की आपत्ति के बाद ये निर्देश वापस ले लिए गए थे। मेहता ने उस समय अपने स्कूल की नीति का बचाव किया था।
इसके अलावा, मीरा-भायंदर में जमीन विवाद को लेकर भी मेहता से जुड़ी एक संस्था का नाम सामने आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के परिचित बताए जाने वाले असगर अली वोहरा ने भायंदर ईस्ट में जमीन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद की शिकायत की थी।
वोहरा ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखी थी। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई और मेहता से जुड़ी संस्था ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ दिया तथा निर्माण संबंधी मंजूरियां वापस ले लीं।