Dombivli Hospital Assault Case: डोंबिवली के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों से कथित मारपीट के मामले में नगरसेवक रमेश सुक या म्हात्रे समेत चार आरोपियों को एक बार फिर जेल जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद चारों ने कल्याण कोर्ट में हाजिर होकर आत्मसमर्पण किया। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में कल्याण की आधारवाड़ी जेल भेज दिया गया।
यह मामला 6 जुलाई 2026 को केडीएमसी के शास्त्रीनगर अस्पताल में हुआ था। प्रसूति के लिए आई एक महिला को अस्पताल में एनआईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई थी। इसी बात को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि रमेश म्हात्रे अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा कर्मचारियों से गाली-गलौज व मारपीट की।
इसके बाद विष्णुनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में रमेश म्हात्रे को जमानत मिली, लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में जाना पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ जमानत मंजूर की थी। आरोपपत्र दाखिल होने तक महाराष्ट्र से बाहर रहने की शर्त के चलते म्हात्रे गोवा चले गए थे।
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 28 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने रमेश म्हात्रे समेत चार आरोपियों की जमानत रद्द कर निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। अदालत ने डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों पर हिंसा के मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक सेवा से जुड़े कर्मचारियों के साथ हिंसा को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई 6 महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
पुलिस ने इस मामले में रमेश म्हात्रे के अलावा रमेश पवार, प्रमोद निकम, अक्षय करंडे और साधना करंडे के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच में डॉक्टरों, नर्सों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के साथ सीसीटीवी फुटेज समेत
अन्य सबूत जुटाए जाने का पुलिस ने दावा किया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद म्हात्रे समेत चार आरोपियों की दोबारा न्यायिक हिरासत में रवानगी हुई है। अब मामले की आगे की सुनवाई कल्याण न्यायालय में होगी।