Nirankari Samagam Samalkha Haryana: 79 वां सालाना निरंकारी संत समागम सतगुरु माता सुदीक्षाजी महाराज और निरंकारी राजपिता रमितजी की मौजूदगी में 23 से 26 अक्टूबर तक हरियाणा के समालखा में संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आस्था और उत्साह के माहौल में होगा। इस समागम में देश-विदेश से लाखों भक्त शामिल होंगे, जो अपने दिलों में आध्यात्मिक जागृति और इंसानियत की एकता का संदेश लेकर जाएंगे।
समागम की सेवाएं रविवार को आस्था, समर्पण और सेवा से भरे माहौल में शुरू हुईं। सेवा स्थल का उद्घाटन निरंकारी राजपिता रमितजी ने किया। इस मौके पर मिशन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य, सेंट्रल सर्विस कोर के अधिकारी और हजारों श्रद्धालु भक्तों ने प्यार और भक्ति के साथ सेवा में हिस्सा लिया। संत निरंकारी मंडल की प्रेसिडेंट राजकुमारी और संत निरंकारी मंडल के सेक्रेटरी जोगिंदर सुखीजा ने गुलदस्ता भेंट कर निरंकारी राजपिताजी का गर्मजोशी से स्वागत किया।
79 वें संत समागम की सेवाओं के उद्घाटन पर मौजूद भक्तों को संबोधित करते हुए निरंकारी राजपिताजी ने संतों को सतगुरु माताजी का प्यार और आशीर्वाद देते हुए कहा कि संत समागम की सेवाओं का यह विशाल रूप अनगिनत संतों की निस्वार्थ सेवा, त्याग और समर्पण का नतीजा है। यही हमें अपने जीवन में भी सेवा और परोपकार की भावना जगाने की प्रेरणा देता है। इंसान का जन्म सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख में शामिल होने के लिए मिला है।
सेवा से 'मैं' की भावना खत्म होती है और 'हम' की भावना पैदा होती है, तभी सेवा का सही मतलब पता चलता है। सतगुरु का ज्ञान वह जागृति है, जो हमारी नज़र बदल देती है और हमें हर इंसान में निरंकार का रूप देखने की प्रेरणा देती है। जब इंसान एक-दूसरे से प्यार और इज़्ज़त करेंगे, तो यह धरती और भी खूबसूरत हो जाएगी। सतगुरु के चरणों में यही प्रार्थना है कि हम सिर्फ़ इंसान के तौर पर ही नहीं, बल्कि अपने कामों और व्यवहार से भी सच्चे इंसान बन सकें।